आरटीआई के तहत अमर उजाला को मिले दस्तावेजों की जांच में सामने आया है कि बगलामुखी मंदिर ट्रस्ट सिर्फ एक ही परिवार के कब्जे में है। ट्रस्ट डीड के नियमों में लिख दिया गया है कि अध्यक्ष यानी सेटलर ट्रस्ट का आजीवन अध्यक्ष बना रहेगा। अध्यक्ष के पास किसी भी ट्रस्टी को हटाने की शक्ति होगी। 27 जून 2013 को महंत देवी गिरी ने आध्यात्मिक, शैक्षणिक और चेरिटेबल गतिविविधियां चलाने के उद्देश्य के लिए बगलामुखी मंदिर ट्रस्ट का गठन किया था।
देवी गिरी ने ट्रस्ट में अपने बेटे रजतगिरी, बहू नेहा गिरी सहित दो अन्य लोगों कुल प्रकाश भारद्वाज तथा केशव दत्त श्रीधर को ट्रस्टी बनाया था। इसमें ट्रस्टी सिर्फ नाम के थे। महंत देवी गिरी की मृत्यु 21 अगस्त 2016 को हुई। मृत्यु से पहले देवी गिरी बेटे रजतगिरी को अपना चेला बनाकर उत्तराधिकारी घोषित कर चुके थे। इसके बाद रजतगिरी को नया महंत नियुक्त किया। 22 अक्तूबर 2018 में डीसी कांगड़ा ने रजतगिरी को मोहतमीम यानी मंदिर का रखवाला नियुक्त किया।
1-9-2018 को अध्यक्ष रजतगिरी ने ट्रस्ट में तीन और नए लोगों कांगड़ा से मुनीष शर्मा, पठानकोट से निशांत महाजन, देहरा से अमित राणा को ट्रस्टी बनाया। ट्रस्ट डीड में जिक्र होने के बावजूद ट्रस्ट को चलाने के लिए उपाध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष आदि पदाधिकारियों की आज तक नियुक्ति नहीं की गई। डीड में लिखा है कि ट्रस्ट में नौ से ज्यादा और 3 से कम ट्रस्टी नहीं हो सकते। वर्ष 2016 से 2018 तक ट्रस्ट को सिर्फ चार लोग चलाते रहे।
आरटीआई से हासिल किए गए ट्रस्ट डीड के दस्तावेजों में साफ लिखा है कि मंदिर की कमाई जनकल्याण के लिए लगेगी। डीड में लिखा है कि ट्रस्ट आय को बगलामुखी मंदिर के रखरखाव के अलावा सराय, स्कूल, कॉलेज, मुफ्त डिस्पेंसरी, क्लीनिकल लेबोरेटरी, अस्पताल, नर्सिंग होम, सामुदायिक भवन, लाइब्रेरी, क्रेच, बनाने के लिए खर्च करेगा।
मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा, सोसाइटियों, चेरिटेबल ट्रस्टों के लिए ट्रस्ट डोनेशन देगा। गरीब और अनाथ बुजुर्गों के लिए आवास बनाएगा। वोकेशनल ट्रेनिंग, कौशल विकास और उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को अनुदान, छात्रवृत्ति, आर्थिक सहायता देगा। गरीब और अक्षम लोगों को आर्थिक सहायता दी जाएगी। मंदिर की आय से पर्यावरण संरक्षण सहित हेरीटेज संपत्ति का संरक्षण किया जाएगा। लेकिन, ट्रस्ट ने सभी उद्देश्यों की पूर्ति नहीं की।