जंगल में वट वृक्ष के नीचे बैठे ये बाबा इन दिनों लोगों के कौतुहल का केन्द्र बने हुए हैं। बाबा विशाल दास महाराज का आशीर्वाद लेने के लिए कई बड़े अधिकारी एवं नेता भी पहुंच रहे हैं। दूर दूर से इनका चमत्कार सुनकर लोग यहां पहुंचने लगे हैं।
हिमाचल के ऊना के तलमेहड़ा में सदाशिव ध्यूंसर महादेव मंदिर से कुछ दूरी पर जंगल इस बाबा के जयकारों से गूंज रहा है। दिन रात यहां पर भक्तजनों का आना जाना लगा हुआ है।
लगभग एक माह पहले वट वृक्ष के नीचे बैठे युवा बाबा के से लोग इसलिए ज्यादा हैरान हैं क्योंकि बाबा अधिकांश आगुंतक को उसके नाम से पुकारते हैं। बिना नाम पूछे ही बाबा भक्त का नाम लेकर उसे बुलाते हैं। उसकी समस्याएं भी बताते हैं।
ऐसा पहले नहीं सुना था
लोगों का कहना है कि आज तक उन्होंने ऐसे बाबा के बारे में कभी नहीं सुना था जो बिना पूछे ही नाम लेकर बुलाते हैं। लोगों की आस्था दिन ब दिन बाबा में बढ़ती जा रही है। उधर, शिवराम जनकल्याण समिति बंगाणा के अध्यक्ष एवं प्रमुख समाज सेवी रूमेल कुमार ने तलमेहड़ा स्थित बाबा के यहां पर आने-जाने वाले भक्तों के लिए एक महीने के लंगर का आयोजन किया है।
समिति के प्रवक्ता चमन लाल फोरमैन ने बताया कि रविवार को समिति के अध्यक्ष रूमेल कुमार ने बल्ह निवासी रजनी देवी सुपत्री निर्मला देवी की शादी के लिए 51 सौ रुपये की आर्थिक सहायता की। इस मौके पर प्रधान ब्रह्मी देवी, सरोती देवी, महेंद्र सिंह, विजय कुमार, रणजीत सिंह, कृष्ण कुमार, जगदेव गुरदेव सिंह आदि मौजूद थे।
कौन है बाबा विशाल
भगवा वस्त्र और झोली-चिमटा धारण किए हुए यह युवा बाबा विशाल मूलत: ऊना जिला के ही कुटलैहड़ क्षेत्र के लिदकोट का रहने वाला है। पूर्व सैनिक प्रीतम चंद के घर में जन्मे विशाल के बारे में बताया जाता है कि उन्होंने रायपुर स्कूल से बारहवीं परीक्षा पास करने के बाद आईटीआई में भी प्रवेश लिया था।
उसके बाद तलवाड़ा में किसी निजी कंपनी में नौकरी भी की, लेकिन कुछ समय बाद ही वे आश्रम में साधु संगत की शरण में चले गए। उसके बाद से लोगों ने विशाल को इसी रूप में देखा। तलमेहड़ा में अब रोजाना बाबा के यहां लोगों की भीड़ एकत्र होने लगी है। कुछ लोग बाबा विशाल को बाबा बालक नाथ जी का रूप भी मान रहे हैं।