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आयुर्वेद घोटाले में पूर्व निदेशक को चार्जशीट करने की तैयारी, सीएम की मंजूरी के बाद होगी कार्रवाई

Sat, 27 Jul 2019 11:22 AM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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सांकेतिक तस्वीर
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आयुर्वेद विभाग में उपकरणों की खरीद के दौरान हुए घोटाले में विभाग के पूर्व निदेशक संजीव भटनागर पर भी गाज गिरने वाली है। कार्मिक विभाग ने स्वास्थ्य विभाग से मिली जांच रिपोर्ट के आधार पर आईएएस अफसर भटनागर के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर मुख्यमंत्री कार्यालय को मंजूरी के लिए भेज दी है। मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद संजीव के खिलाफ शासन स्तर पर कार्रवाई शुरू होगी।

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आयुर्वेद घोटाले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने खरीद कमेटी के सदस्यों को निलंबित कर दिया था। इसके अलावा तत्कालीन निदेशक और आईएएस संजीव भटनागर को भी महकमे से हटा दिया गया। निलंबित अधिकारियों में उपनिदेशक कांगड़ा जोन डॉ. तेजस्वी विजय आजाद, जिला शिमला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. केडी शर्मा और शिमला जिले के संधू में तैनात उपमंडल आयुर्वेद अधिकारी डॉ. शैली बंसल शामिल हैं।

साथ ही स्वास्थ्य मंत्री ने मामले में विशेष सचिव के स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाकर जांच रिपोर्ट भी तलब कर ली। जांच में निदेशक की गलती सामने आई, लेकिन निदेशक आईएएस अधिकारी थे इसलिए विभाग ने उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए फाइल कार्मिक विभाग को भेज दी गई।
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जांच रिपोर्ट के अध्ययन के बाद अब कार्मिक विभाग ने आरोप सही पाते हुए भटनागर को चार्जशीट करने की सिफारिश कर दी है। सूत्रों का कहना है कि आरोपी सही निकले तो भटनागर के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के अलावा खरीद में हुए करीब चालीस लाख के सरकारीी नुकसान की भी रिकवरी हो सकती है।

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कथित धांधली में कांगड़ा के पूर्व सीएमओ चार्जशीट

कांगड़ा में स्वास्थ्य संस्थानों में बायोमीट्रिक मशीनें लगाने में हुई कथित धांधली में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी कांगड़ा पीएस राणा को चार्जशीट कर दिया है।

विभाग की ओर से कराई गई जांच में उन पर लगे सस्ती मशीनों को महंगे दामों में खरीदने का आरोप सही पाया गया है। चूंकि, राणा रिटायर हो चुके हैं, ऐसे में विभाग अब उनका पक्ष सुनने के बाद रिकवरी की कार्रवाई शुरू करेगा।

राणा के निर्देश पर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में बायोमीट्रिक मशीनें लगाने के आदेश जारी किए गए थे। इस दौरान एक विशेष फर्म से ही इन मशीनों को खरीदने के लिए कहा गया था। आरोप है कि सस्ती मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद विभाग ने एक फर्म से 15 हजार रुपये की कीमत वाली मशीनों को 41 हजार रुपये में खरीदा।

मामले की शिकायत स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार तक पहुंची। इसके बाद मंत्री के निर्देश पर विभागीय जांच कराई गई। जांच में भ्रष्टाचार के आरोप सही पाए गए। पता चला कि सीएमओ के इस आदेश के चलते विभाग को करीब 43 लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है।

जांच रिपोर्ट आने के बाद विभाग ने तत्कालीन सीएमओ राणा को चार्जशीट कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि मामले में रिकवरी उनकी पेंशन से की जा सकती है। अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य आरडी धीमान ने बताया कि नुकसान का सही आंकलन किया जा रहा है। चूंकि, वह रिटायर हो चुके हैं, इसलिए रिकवरी को लेकर कार्रवाई की जाएगी।
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