तीन दिन पहले चंडीगढ़ में हुई बैठक में सैनिक कल्याण विभाग के सचिव आरएन बत्ता, उप सचिव प्रवीण कुमार टाक, डीसी सिरमौर डॉ. आरके परुथी के अलावा सैनिक कल्याण विभाग के अन्य अधिकारियों ने सेना के अधिकारियों से चर्चा की। चर्चा के बाद इस बात पर दोनों पक्षों में एक राय बनी कि हिमाचल सरकार सेना को पालमपुर, कसौली या योल में एकमुश्त 600 बीघा जमीन देगी, जिसके बदले सेना विवादित क्षेत्रों में अपना क्लेम छोड़ देगी।
सेना की जमीन से कब्जे छुड़ाना सरकार के लिए मुश्किल
सेना के साथ भले ही सरकार विवाद सुलझाने का दावा करे, लेकिन इन जमीनों पर अवैध रूप से बसे लोग सरकार के लिए गले की फांस बने हैं। इस जमीन पर विभिन्न जिलों में अधिकारियों ने कुछ लोगों को मालिकाना हक दे दिया और कुछ ने कब्जा कर लिया। राजनीतिक लाभ के चलते नेताओं ने भी कब्जाधारियों का पक्ष लेना शुरू कर दिया। सरकार अगर उस जमीन को कब्जे में लेती है तो सेना के बजाय अब कब्जाधारकों को लेकर फैसला लेना होगा।