आस्ट्रेलियाई सांसदों ने चीन पर तिब्बतियों को अल्पसंख्यक बनाने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। चार सदस्यीय आस्ट्रेलियाई सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने मैकलोडगंज स्थित निर्वासित तिब्बत सरकार के मुख्यालय का दौरा करने के बाद दलाईलामा की मध्य मार्ग नीति का खुलकर समर्थन किया।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल सदस्यों ने कहा, चीन को दलाईलामा की मध्य मार्ग नीति को स्वीकार कर लेना चाहिए। मैकलोडगंज स्थित नोरबू हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे सीनेटर डेरेन हिंच और लिबरल पार्टी से पूर्व
ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री के प्रतिनिधि केविन एंड्रयूज, सीनेटर किंब्रेले किचिंग और लेबर पार्टी से प्रतिनिधि मीरिल स्वैंसन ने धर्मगुरु का पक्ष लेते हुए कहा दलाईलामा ने केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के नेतृत्व के अंतर्गत तिब्बती आंदोलन की आग को जिंदा रखा हुआ है।
‘तिब्बतियों को अल्पसंख्यक बनाने की कोशिश में है चीन’
दलाईलामा
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चीन तिब्बत में तिब्बती जनसंख्या को कम करके उसे अल्पसंख्यक बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय तिब्बती प्रशासन की कार्यप्रणाली तारीफ के काबिल है। सीनेटर डेरे हिंच ने कहा, 1980 के दशक में जब उनके डेस्क पर शांतिप्रिय तिब्बतियों पर चीन के अत्याचारों की फुटेज पहुंची, वे तभी से तिब्बती समस्या के प्रति सहानुभूति रखते आए हैं।
आस्ट्रेलियाई संसद के सदस्य एवं पूर्व रक्षा मंत्री केविन एंड्रयूज ने कहा कि धर्मशाला में हमारा मिशन तथ्य खोज था। उन्होंने कहा कि तिब्बती लोगों की स्वायत्तता ही कुछ ऐसी है जो विश्व के नेताओं के ध्यान को आकर्षित करती है।
दुनिया भर के विभिन्न देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और कई अन्य विश्व के नेताओं ने समय-समय पर तिब्बत के अंदर की स्थिति को हल करने की आवश्यकता के बारे में बात की है।
कहा- चीनी सरकार पर दबाव डाला जाए
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उन्होंने कहा, आस्ट्रेलियाई संसद के सदस्यों के रूप में उनके यहां होने का अर्थ अंतरराष्ट्रीय स्वरों में उनका शामिल होना है। मध्य मार्ग नीति ही तिब्बत समस्या का उपयुक्त समाधान है।
तिब्बत के मुद्दे पर लगातार बात की जानी चाहिए और चीनी सरकार पर दबाव डाला जाना चाहिए। कहा कि वे लौटकर भी आस्ट्रेलियाई संसद में तिब्बत मसले को उठाते रहेंगे।
लेबर पार्टी से प्रतिनिधि मीरिल स्वैंसन ने कहा कि वह तिब्बती संस्कृति से बहुत प्रभावित हुईं। सदस्यों ने कहा कि वे आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री से अनुरोध करेंगे कि जब भी दलाईलामा आस्ट्रेलिया का दौरा करें तो वह धर्मगुरु से जरूर मुलाकात करें।