मशोबरा वन स्टॉप सेंटर का मामला, 24 घंटे लगातार ली जा रही महिला कर्मियों से ड्यूटी
क्रॉसर
सेंटर में हिंसा पीड़ित महिलाओं को दिया जाता है आश्रय
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी शिमला में महिलाओं की सुरक्षा के लिए खोले गए वन स्टॉप सेंटर में तैनात आउट सोर्स महिला कर्मचारी खुद प्रताड़ना का शिकार हो रही हैं। आरोप है कि 2 महीने से सेंटर एडमिनिस्ट्रेशन केंद्र प्रबंधक की ओर से कर्मचारियों की ड्यूटी नियमों के विपरीत लगाई गई है।
सेंटर में तैनात महिला कर्मियों से 24 घंटे ड्यूटी ली जा रही है। कर्मियों ने केंद्र प्रबंधक के पास शिकायत की तो उल्टा प्रताड़ित उन्हें किया जा रहा है। इस मामले को लेकर एक अधिकारी और महिला कर्मचारी की बातचीत का ऑडियो वायरल हो रहा है। इसमें महिला, अधिकारी से कह रही है कि ऐसा कैसा ड्यूटी रोस्टर जिसमें लगातार चार दिन तक लगातार ड्यूटी देने के लिए कहा जा रहा है। महिला कह रही है कि उसके पिता बीमार हैं लगातार ड्यूटी देने में वह सक्षम नहीं। महिला आउटसोर्स कर्मचारी हैं। मामला सामने आने के बाद महकमा छानबीन करने की बात कह रहा है।
पांच महीने से सेंटर में आउटसोर्स पर सेवारत महिला कर्मी रोस्टर के तहत 24 घंटे ड्यूटी देने को मजबूर है। बताया कि मार्च को वन स्टॉप सेंटर शुरू किया तो रोस्टर के मुताबिक ड्यूटी लगाई गई। अप्रैल तक रोस्टर के मुताबिक ड्यूटी लगती रही। मई के बाद पुराने रोस्टर के विपरीत 24 घंटे ड्यूटी ली जा रही है। इनमें से एक महिला कर्मी ने तो 24 घंटे ड्यूटी देने के बावजूद भी गैर हाजिरी लगाने का आरोप लगाया है।
सचिव से मांगी है मामले पर रिपोर्ट : मंत्री
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री सरवीण चौधरी ने कहा कि उनके संज्ञान में मामला आया है। महिला बाल विकास विभाग के सचिव से पूरे मामले में रिपोर्ट तलब की है।
कर्मचारियों के लिए लिए हैं बयान : चौहान
बाल विकास अधिकारी वंदना चौहान ने बताया कि इस पूरे मामले की जांच की जा रही है। वन स्टॉप सेंटर में महिला कर्मचारियों और स्टाफ कर्मचारियों के भी बयान लिए हैं। कहा कि महिला कर्मचारियों की हर संभव मदद की जाएगी। 24 घंटे ड्यूटी लेना नियमों के विपरीत है।
मशोबरा में मार्च से शुरू हुआ वन स्टॉप सेंटर
हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिए बाल विकास मंत्रालय और जिला प्रशासन की ओर से मशोबरा में वन स्टॉप सेंटर की शुरुआत मार्च में शुरू की थी। जिला का यह एकमात्र वन स्टॉप सेंटर है। सेंटर में पीड़िता को एक ही छत के नीचे स्वास्थ्य, कानूनी परामर्श, मनोवैज्ञानिक और पुलिस की सहायता 24 घंटे सातों दिन निशुल्क सुविधा देने का प्रावधान है।