सैलरी बिल वीएसके पोर्टल पर दर्ज हाजिरी की जांच के बाद बनेंगे, व्यवस्था लागू
सरकारी सीबीएसई स्कूलों में अब वीएसके (स्विफ्टचैट) पोर्टल पर दर्ज उपस्थिति ही शिक्षकों के वेतन की कुंजी बनेगी। स्कूल शिक्षा निदेशालय की ओर से मंगलवार शाम जारी निर्देशों के अनुसार अब सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों से शिक्षकों के सभी सैलरी बिल तभी बनाए जाएंगे जब संबंधित शिक्षकों की ओर से वीएसके पोर्टल पर दर्ज की गई उपस्थिति की ठीक से जांच हो जाएगी। अगर कोई शिक्षक पोर्टल पर अपनी उपस्थिति ठीक से दर्ज नहीं करता है तो लागू नियमों/निर्देशों के अनुसार संबंधित शिक्षक की सैलरी से अगली बार (या स्थिति के अनुसार) उतनी रकम काट ली जाएगी। इसके अलावा, यह भी तय किया गया है कि वीएसके हाजिरी पोर्टल को जल्द से जल्द ई- सैलरी सिस्टम के साथ जोड़ा जाए, ताकि सैलरी बिल बनाने के लिए हाजिरी का ऑटोमैटिक वेरिफिकेशन आसानी से हो सके। अगर कोई टीचर सैलरी से ऐसी कटौती से असंतुष्ट है, तो वह लागू नियमों के प्रावधानों के तहत हिमाचल प्रदेश के स्कूल शिक्षा निदेशक के पास इसके खिलाफ अपील कर सकता है। शिक्षकों के वेतन बिल बनाने की इस व्यवस्था को तुरंत, यानी सितंबर 2026 के महीने से, सीबीएसई से जुड़े सभी सरकारी स्कूलों में लागू किया जाएगा। निदेशालय ने सभी उप शिक्षा निदेशकों को निर्देश दिए हैं कि अथॉरिटी के इस फैसले का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।
छात्रों को यूनिफॉर्म सब्सिडी नहीं मिली, विभाग ने अधिकारियों पर कसा शिकंजा
वहीं प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे 3,110 छात्र स्मार्ट यूनिफॉर्म सब्सिडी के इंतजार में हैं। यूनिफॉर्म सब्सिडी के डीबीटी से जुड़े आंकड़ों की समीक्षा में यह मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने अब अधिकारियों की जवाबदेही तय कर दी है। विभाग ने सभी उप निदेशकों को निर्देश दिए हैं कि वे प्रत्येक छात्र के स्तर पर सब्सिडी की स्थिति की जांच करें और एक सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट भेजें। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की अध्यक्षता में तीन अगस्त को हुई समीक्षा बैठक के बाद शिक्षा निदेशालय ने मंगलवार को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने साफ किया है कि योजना के लिए पात्र एक भी विद्यार्थी लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए। इसके लिए जिला स्तर पर लंबित मामलों की पड़ताल कर तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया है।
स्मार्ट यूनिफॉर्म सब्सिडी के प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) की समीक्षा के दौरान सामने आया कि 3,110 विद्यार्थियों को अभी तक सब्सिडी का भुगतान नहीं हुआ है। इससे योजना के क्रियान्वयन और लाभार्थियों तक राशि पहुंचने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए हैं। अब विभाग ने जिला अधिकारियों को छात्रवार स्थिति खंगालने और लंबित भुगतान के कारणों का पता लगाने को कहा है। उप निदेशकों को अपने-अपने जिलों में प्रत्येक प्रभावित छात्र की स्थिति की समीक्षा करनी होगी। यह देखा जाएगा कि विद्यार्थी योजना के लिए पात्र है या नहीं, डीबीटी में भुगतान क्यों अटका है और यदि कोई तकनीकी अथवा दस्तावेजी कमी है तो उसे कैसे दूर किया जाए।
विभाग ने इस पूरी प्रक्रिया को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने केवल लंबित सब्सिडी का ब्योरा ही नहीं मांगा है, बल्कि उपयोगिता प्रमाण पत्र और अप्रयुक्त राशि का पूरा विवरण भी तलब किया है। यदि किसी संस्था के पास योजना की राशि खर्च किए बिना पड़ी है तो उस पर अर्जित ब्याज की जानकारी भी देनी होगी। इससे योजना के लिए जारी राशि के इस्तेमाल की स्थिति भी स्पष्ट होगी। शिक्षा निदेशालय ने अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा में अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अब जिलों से मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर यह सामने आएगा कि 3,110 छात्रों को सब्सिडी क्यों नहीं मिली और कितने मामलों में भुगतान की प्रक्रिया पूरी की गई।