एमबीबीएस की सीटों के लिए जितना अधिक रुझान युवाओं में देखा जाता है, शायद डेंटिस्ट बनने के लिए उतना नहीं है। इस बात का पता इससे चलता है कि एमबीबीएस और बीडीएस की ऑनलाइन काउसलिंग में पहले ही राउंड में एमबीबीएस की करीब 98 प्रतिशत सीटें भर गईं जबकि बीडीएस की 60 प्रतिशत सीटें अभी खाली हैं। शुक्रवार को अटल मेडिकल एंड रिसर्च विवि नेरचौक ने एमबीबीएस और बीडीएस की खाली बची सीटों की सूची कैटेगरी और कॉलेज वाइज जारी कर दी है।
इसके आधार पर ही यह प्रत्यक्ष देखा जा सकता है कि मेडिकल कॉलेजों में मात्र दो प्रतिशत सीटें की खाली रही हैं। डेंटल कॉलेजों में 60 प्रतिशत सीटें खाली रह गई हैं। हालांकि, निजी क्षेत्र के महर्षि मार्केंडेश्वर विवि कुमारहट्टी सोलन में अभी एमबीबीएस की 106 सीटें खाली बची हैं। जारी की सूची के मुताबिक अगर मेडिकल और डेंटल कॉलेजों की खाली सीटों का ब्योरा देखा जाए तो यह कैटेगरी वाइज अलग-अलग है।
अटल मेडिकल एंड रिसर्च विवि नेरचौक के परीक्षा नियंत्रक डॉ. प्रवीण शर्मा ने बताया कि एमबीबीएस और बीडीएस की पहले राउंड की काउंसलिंग में एमबीबीएस की मात्र एक से दो प्रतिशत सीटें ही खाली बची हैं, जबकि बीडीएस की 60 प्रतिशत सीटें अभी खाली हैं, जिन्हें दूसरे राउंड में भरा जाएगा। इसके लिए जल्द काउंसलिंग होगी।
इन कॉलेजों में एमबीबीएस की सीटें खाली
अगर प्रदेश के छह मेडिकल कॉलेजों की बात की जाए तो यहां पर इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला में एमबीबीएस की कुल 120 सीटों में से मात्र 11 सीटें खाली हैं। डॉ. राधाकृष्णन गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में आठ सीटें, श्री लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नेरचौक में तीन, डॉ. राजेंद्र प्रसाद गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज टांडा कांगड़ा में 11, पंडित जवाहरलाल नेहरू गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल चंबा में आठ और डॉ. यशवंत परमार गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज नाहन सिरमौर में एमबीबीएस की 10 सीटें खाली बची हैं।
इन बीडीएस कॉलेजों में खाली बची हैं सीटें
बीडीएस के चार डेंटल कॉलेजों में हिमाचल इंस्टीट्यूट आफ डेंटल साइंस पांवटा साहिब सिरमौर में 100 में से 67 सीटें खाली हैं। भोजिया डेंटल कॉलेज एवं अस्पताल नालागढ़ में 60 में से 47 सीटें, हिमाचल डेंटल कॉलेज सुंदरनगर में 60 में से 45 और प्रदेश गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज एवं अस्पताल शिमला में बीडीएस की 100 में से 34 सीटें खाली रह गई हैं।