कोई भी मुझसे मिले बगैर निराश न हो, मैं सबको सुनना चाहता हूं। बच्चों, महिलाओं से लेकर बुजुर्गों तक सबका ख्याल रखते थे। पूर्व प्रधानमंत्री मनाली आते थे तो वे घाटी की हसीन वादियों के बीच मौन साधना में लीन रहते थे।
इस दौरान अटल प्रीणी स्थित अपने घर के आंगन और सेब बगीचों में चहलकदमी कर घाटी की वादियों को निहारते थे। मौन साधना के दौरान अपने कर्मचारियों के साथ इशारों से बात करते थे।
पूर्व सांसद महेश्वर सिंह कहते हैं कि अटल कभी भी कुल्लू के परिधि गृह में नहीं रहे। वे मौहल या मनाली में रहते थे। यहां उन्हें काफी सुुकून मिलता था। वे शांत वादियों में कविताएं लिखते थे।
मौहल में ब्यास किनारे भी कई कविताएं लिख चुके हैं। वाजपेयी जब मनाली में थे तो उस समय उन्होंने करीब दस दिन तक यहां से सरकार चलाई थी।