जितनी फोर्स आरोपी को ढूंढने के लिए लगाई जानी चाहिए, उतनी लगा दी गई हैं। उन्होंने दावा किया कि आरोपी जल्द ही सलाखों के पीछे होगा। उपायुक्त सोलन विनोद कुमार ने कहा कि इस मामले की पूरी जांच संबंधित अथॉरिटी कर रही है।
जिला प्रशासन माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार 13 होटलों व गेस्ट हाउसों का अवैध निर्माण तुड़वा रहा है। माना जा रहा है कि आरोपी पहले से ही वारदात को अंजाम देने का मन बनाकर आया था।
इसीलिए वह अपने साथ पिस्तौल लेकर मौके पर मौजूद था। बड़ा सवाल यह है कि जब उसने बंदूक तानी और तीन राउंड फायर किए तो जवाब में पुलिस ने कार्रवाई क्यों नहीं की। क्या पुलिस उस पर गोली नहीं चला सकती थी। इतने अधिकारी मौजूद होने के बावजूद पुलिस गोली चलाने से क्यों कतरा गई।
जिला में प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान पहले भी अधिकारियों पर हमले हो चुके हैं लेकिन कसौली प्रकरण में महिला अधिकारी को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है। ताता कसौली गोलीकांड से अधिकारी अपनी सुरक्षा को लेकर खासे चिंतित हैं।
केस-1
7 अगस्त, 2013 को सैणीमाजरा के समीप सरसा नदी में खनन पर कार्रवाई के दौरान तत्कालीन आईएएस अधिकारी एसडीएम नालागढ़ डा. यूनुस पर हमला हुआ था। हमले के बाद धारा 279, 336, 353 के तहत केस दर्ज हुआ और बाद में धारा 307 लगाई गई। ग्रामीणों के विरोध और पुलिस की जांच के बाद धारा 307 हटाई गई और न्यायिक हिरासत में चल रहे मक्खन को बेल मिली थी।
केस-2
एसडीएम पर हमले के 21 दिन बाद मानपुरा में नदी की ओर जा रहे तत्कालीन एसपी बद्दी एस अरूल कुमार की गाड़ी के काफिले को दो ट्रैक्टरों ने रोक दिया। एसपी को सूचना थी कि नदी में खनन हो रहा है, लेकिन वह नदी तक पहुंच ही नहीं पाए थे।