प्राकृतिक आपदा के बाद उत्तराखंड के जोशीमठ की तर्ज पर हिमाचल में भी आपदा पश्चात आवश्यकता मूल्यांकन (पीडीएनए) किया जाएगा। इस मूल्यांकन के आधार पर प्रदेश को पुर्ननिर्माण के लिए केंद्र सरकार से आर्थिक सहयोग लेने में आसानी होगी। प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) से प्रदेश में पीडीएनए करने का आग्रह किया था जिसके बाद गुरुवार को 6 जिलों के अधिकारियों के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण आयोजित किया गया। निदेशक आपदा प्रबंधन डीसी राणा ने बताया कि पीडीएनए की मदद से प्रदेश को हुई भौतिक क्षति और आर्थिक नुकसान का मूल्यांकन किया जाएगा। जिससे प्रभावित क्षेत्रों की तत्काल, अल्पकालिक और दीर्घकालिक जरूरतों की पहचान कर उनसे उबरने में मदद मिलेगी और पुनर्निर्माण योजनाएं बनाई जा सकेंगी।
चंबा, मंडी, कुल्लू, किन्नौर शिमला और सोलन जिले के बाद बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, सिरमौर, लाहौल और स्पीति और ऊना जिले में पीडीएनए होगी। इसी कड़ी में वीरवार को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की सहायता से मूल्यायंकन शुरू किया गया। बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, सिरमौर, लाहौल और स्पीति और ऊना जिलों के जिला प्रशासन के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण आयोजित किया गया जिसमें पीडब्ल्यूडी, बिजली, कृषि, बागवानी, पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा और समाज कल्याण विभाग के पदाधिकारियों ने भाग लिया। एनडीएमए टीम के विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण दिया। एनडीएमए के संयुक्त सचिव कुणाल सत्यार्थी ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य जिला स्तरीय अधिकारी को अपने क्षेत्रों में नुकसान का आकलन सही तरीके से कर डाटा संग्रहण एवं ऑनलाइन प्लेटफार्म पर अपलोड करने की जानकारी देना था।