प्रदेश में चरणबद्ध हो रहे पंचायत चुनाव में होमगार्ड और आशा वर्कर किसी भी पद के लिए दावेदारी ठोक सकते हैं। दोनों पदों पर कार्यरत कर्मचारी सरकार के लिए कार्य करते हैं, लेकिन उक्त कर्मचारियों को पंचायत चुनाव में लड़ने की छूट है।
कैजुअल और सिजनल नियुक्ति वाले कर्मचारियों को पंचायत चुनाव में किसी भी पद पर चुनाव लड़ने की छूट दी गई है। इनमें मुख्यतया होमगार्ड और आशा वर्कर शामिल हैं। जलवाहक इसमें शामिल नहीं हैं। दोनों पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को पंचायत चुनाव में किसी भी पद पर नामांकन भरने के लिए कार्यालय से छुट्टी लेनी होगी।
इसके बाद ये चुनाव में नामांकन भर कर दावेदारी प्रस्तुत कर सकते हैं। केवल कैजुअल कर्मचारी ही पंचायत चुनाव में भाग ले सकता है, जबकि अन्य कर्मचारी चुनाव में किसी भी तरह की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर भागीदारी नहीं ले सकता है।
सबसे अधिक नोटा पर द्वितीय रहा उम्मीदवार विजयी
इधर, जिला पंचायत अधिकारी गिरीश शर्मा ने बताया कि होमगार्ड और आशा वर्कर समेत अन्य कैजुअल कर्मचारी पंचायत चुनाव में किसी भी पद पर नामांकन भरकर चुनाव लड़ सकते हैं। नामांकन के दिन कार्यालय से स्वीकृत छुट्टी लेना अनिवार्य है। केवल कैजुअल और सिजनल नियुक्त कर्मचारी ही चुनाव लड़ सकते हैं।
इस बार पंचायत चुनाव में नोटा का प्रावधान किया गया है। इसमें मतदाता पसंद का उम्मीदवार न होने पर नोटा का चयन कर सकते हैं। बैलेट पेपर में आखिरी नंबर में नोटा दिया जाएगा। नोटा स्टैंप से लिखा गया होगा। पंचायत चुनाव के परिणाम में सबसे अधिक नोटा होने की सूरत पर दूसरे नंबर में आए उम्मीदवार को ही विजयी माना जाएगा।
किसी को नहीं रोकेंगे जिप चुनाव लड़ने से : सुक्खू
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल में पंचायतीराज चुनाव पार्टी सिंबल पर नहीं हो रहे हैं। पार्टी की कोशिश है कि जिला परिषद और बीडीसी के चुनाव में पार्टी समर्थित एक ही उम्मीदवार मैदान में उतरे। अगर कोई व्यक्ति नहीं मान रहा है तो पार्टी की ओर से किसी के लिए रोक-टोक नहीं होगी। चुनाव लड़ने का अधिकारी सबको है।
पार्टी की ओर से किसी को भी चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा सकता है। सुक्खू ने प्रेसवार्ता में बताया कि पंचायतों में प्रधान और उपप्रधान का चुनाव गांव की अपनी राजनीति के आधार पर होता है। पार्टी इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहती। जिला परिषद और बीडीसी का चुनाव बड़ा है। ऐसे में सिर्फ पार्टी कार्यकर्ताओं को आपस में सहमति बनाए रखने की बात कह सकती है।
जिला परिषद के लिए सीएम ले चुके बैठक
मुख्यमंत्री शिमला ग्रामीण में जिला परिषद की सीट को लेकर कार्यकर्ताओं की बैठक ले चुके है। इसमें उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर एक ही प्रत्याशी को मैदान में उतारने की बात ही है। दूसरी ओर, प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सुक्खू का कहना है कि जिला परिषद की सीट पर किसी भी उम्मीदवार को बिठाया नहीं जाएगा।
चुनाव की तारीख तय, रोस्टर का पता नहीं
राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश की नगर परिषद और नगर पंचायतों में चुनाव का एलान कर दिया है। मजे की बात यह है कि प्रदेश सरकार ने अभी तक इन निकायों और नगर पंचायत के लिए अध्यक्ष पद का रोस्टर तक जारी नहीं किया है। नगर परिषद और नगर पंचायतों में रोस्टर में अध्यक्ष पद की सीट को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
निकायों और नगर पंचायतों में अध्यक्ष की सीट किस वर्ग के लिए आरक्षित है, यह तय होने के बाद ही शहरों में राजनीति गरमाएगी। इस बार नगर परिषद और नगर पंचायतों में अध्यक्ष का चयन इस बार पार्षद करेंगे। हिमाचल में 54 शहरी निकाय हैं। इनमें शिमला और धर्मशाला दो नगर निगम हैं, जबकि 29 नगर परिषद और 23 नगर पंचायत हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त टीजी नेगी ने शिमला और धर्मशाला नगर निगम को छोड़कर अन्य 52 नगर परिषद और नगर पंचायत में 10 जनवरी को चुनाव का एलान किया है। हालांकि, सरकार दावा कर रही है कि वार्डों का पुनर्सीमांकन के बाद अध्यक्ष पद का रोस्टर तैयार किया जा रहा है। दो दिन के भीतर नगर परिषद और नगर पंचायत का रोस्टर जारी हो जाएगा।
नगर परिषद, नगर पंचायत में उपाध्यक्ष सीट ओपन
हिमाचल की नगर परिषद और नगर पंचायत में उपाध्यक्ष पद की सीट ओपन है। शहरी विकास विभाग की ओर से सिर्फ अध्यक्ष पद का रोस्टर जारी किया जाना है।