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Shimla News: व्यावसायिक सिलिंडर महंगा होते ही खुद बढ़ा लिए चाय-परांठे के दाम

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राजधानी में कुछ ढाबा संचालकों ने 20 रुपये का कर दिया चाय का कप, परांठे के वसूल रहे हैं 60 से 80 रुपये
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लोग बोले, बिना प्रशासन की मंजूरी के कैसे तय किए दाम

संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। व्यावसायिक गैस सिलिंडर महंगा होते ही राजधानी में चाय और परांठे के दाम कुछ ढाबा संचालकों ने खुद ही बढ़ा लिए हैं। ढाबा मालिकों, टी स्टॉल संचालकों ने मनमर्जी से शनिवार से चाय के 20 रुपये प्रति कप वसूलना शुरू कर दिए हैं। शहर में पहले 15 रुपये में चाय का कप मिलता था।

एकाएक गैर सिलिंडरों के दामों में आए उछाल के बाद शहर के आम लोगों के होश उड़ गए हैं। शहर के मिडिल बाजार स्थित चाय और मिठाई की दुकान में इस तरह की स्थिति देखने को मिली। 50 रुपये में मिलने वाला परांठा भी ढाबा संचालक ने 80 रुपये में देना शुरू कर दिया है। ढाबा संचालकों की यह मनमर्जी आम लोगों को पर भारी पड़ रही है। जिला प्रशासन भी दुकानदारों की इस मनमर्जी के आगे बेबस नजर आया, न ही कोई कार्रवाई की गई। इसके अलावा शहर के अन्य हिस्सों में भी आलू का परांठा 40 से 50 रुपये में बिना दाल के परोसा जा रहा है।
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शहर में बढ़ती महंगाई का असर अब आम लोगों के रोजमर्रा की खाने-पीने की चीजों पर साफ दिखाने देने लगा है। कमर्शियल गैस सिलिंडरों की कीमतों में इजाफा होते ही मिडिल बाजार के कुछ दुकानदारों ने चाय और परांठे के दाम मनमर्जी से बढ़ा दिए हैं। लोगों ने सवाल उठाया है कि जिला प्रशासन ही खाने पीने के दामों के रेट तय करता है। ऐसे में ढाबा संचालक खुद कैसे दाम बढ़ा सकते हैं। लोगों का कहना है कि मध्य वर्ग और दैनिक आय पर निर्भर लोगों के लिए बाहर खाना महंगा सौदा बनता जा रहा है। लोगों ने मांग की है कि बाजार के जानकारों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया तो आने वाले दिनों में अन्य दुकानदार भी इसी तरह कीमतें बढ़ा सकते हैं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बाजार में नियमित निरीक्षण किया जाए और खाने-पीने की वस्तुओं के लिए एक उचित मूल्य सूची तय करवाई जाए।

जिले में खाद्य पदार्थों के रेट प्रशासन तय करता है लेकिन पिछले कई सालों से रेट नहीं बढ़ाए गए हैं। दूसरी ओर शहर के कुछेक दुकानदार मनमर्जी से आए दिन रेट बढ़ा देते हैं। जिला नियंत्रक खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले नरेंद्र धीमान ने कहा कि खाद्य पदार्थों के रेट बढ़ाने का मामला ध्यान में नहीं है। अगर ऐसा है तो इसकी जांच की जाएगी।



चना-भटूरा 90 रुपये की प्लेट, नहीं भरता पेट
शहर में चना-भटूरा की प्लेट के 90 रुपये वसूले जाते हैं। लोगों का कहना है कि भटूरा कागज की तरह बनाया होता है जिससे पेट नहीं भरता। ऐसे में लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि प्लेट के दाम तय करते वक्त इस बात का भी ध्यान रखा जाए कि भटूरा कैसा हो। कुछ जगह अगर चने दोबारा लेने हों तो उसके दस रुपये अलग से वसूले जाते हैं। आलम यह है कि चना भटूरा, कुलचा, चना टिक्की और दही भल्ला जैसे स्ट्रीट फूड भी अब लोगों को महंगे मिल रहे हैं।
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लस्सी का एक गिलास 80 में
शहर में लस्सी का एक गिलास 80 रुपये में मिल रहा है। बाजार में लस्सी 35 से 40 रुपये प्रति लीटर मिलती है। एक गिलास में महज दो सौ से ढाई ग्राम लस्सी आती है। ऐसे में दुकानदार एक किलो लस्सी पर 420 रुपये तक कमा रहा है। वहीं जिला प्रशासन नींद में है। ऐसे मामलों में न तो निरीक्षण किए जा रहे हैं न ही कोई कार्रवाई हो रही है। शहर के ढाबों में भोजन करने वालों में ज्यादातर सैलानी होते हैं या फिर खरीदारी के लिए आया कोई मजबूर व्यक्ति।


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