250 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले की जांच कर रहे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने शिमला की सीबीआई अदालत में दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की। इसमें नाइलेट के नाम पर प्रदेश में फर्जी संस्थान खोलकर किए 29.80 करोड़ के घोटाले में सीबीआई ने शिक्षा विभाग के तत्कालीन अधीक्षक अरविंद राज्टा और उसकी पत्नी बबीता राज्टा, शिक्षा विभाग के अफसरों समेत 11 लोगों को आरोपी बनाया है। राज्टा को इससे पहले वाली चार्जशीट में भी आरोपी बनाया था।
छानबीन में पता चला है कि अरविंद राज्टा की पत्नी बबीता राज्टा, कृष्ण कुमार, राजदीप सिंह ने प्रदेश में नाइलेट और आईटीआई के नाम पर नौ संस्थान खोले थे। इन संस्थानों को किसी भी अधिकृत संस्था से कोई कोर्स करवाने की अनुमति नहीं थी। इसके बावजूद शिक्षा विभाग के अधिकारियों, बैंक अफसरों की मिलीभगत से उन्होंने 8894 छात्रवृत्ति के नाम पर 29.80 करोड़ रुपये हड़प लिए। इसके लिए सोलन, पंचकूला, चंडीगढ़ में पीएनबी और इलाहाबाद बैंक जो कि अब इंडियन बैंक में मर्ज हो चुका है, उनमें विद्यार्थियों के नाम पर सैकड़ों फर्जी खाते खोले गए। बैंक अफसरों से मिलकर यहां से राशि एएसए मार्केटिंग सॉल्यूशन के नाम पर खोले गए खाते में भेजी गई। इसमें बैंक अफसरों को रिश्वत दी गई।
राज्टा की पत्नी की थी 33 फीसदी हिस्सेदारी
सीबीआई की जांच में यह खुलासा हुआ है कि अरविंद राज्टा की पत्नी बबीता राज्टा की इन संस्थानों में 33 फीसदी हिस्सेदारी थी। नियमों को ताक पर रखकर ऐसे संस्थानों को करोड़ों की छात्रवृत्ति जारी की गई जो पात्र नहीं थे। यह संस्थान विद्यार्थियों को काउंसलिंग के नाम पर बुलाते थे और उनके दस्तावेज लेकर उनके नाम पर बैंकों में फर्जी खाते खोलते थे। इन्हीं खातों से करोड़ों की छात्रवृत्ति बैंक अफसरों की मिलीभगत से आरोपियों के खातों में ट्रांसफर होती थी।
सीबीआई ने इनको बनाया आरोपी
अरविंद राज्टा, उसकी पत्नी बबीता राज्टा, इनके पार्टनर कृष्ण कुमार, राजदीप सिंह, इंडियन बैंक के शाखा प्रबंधक मंगल सिंह नेगी, पीएनबी के सेवानिवृत्त शाखा प्रबंधक अरुण झांब, जगजीत सिंह, शिक्षा विभाग की असिस्टेंट डायरेक्टर माला मेहता, अधीक्षक अशोक कुमार, श्रीराम शर्मा और सुरेंद्र मोहन कंवर शामिल हैं।