केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वीरभद्र सरकार पर त्रिदेव सम्मेलन में तीखा हमला किया। बूथ अध्यक्षों, बूथ पालकों और बूथ लेवल एजेंटों को संबोधित करते हुए अरुण जेटली ने कहा कि हिमाचल सरकार के भ्रष्टाचार की गाथाएं दिल्ली तक सुनाई देती हैं।
भ्रष्टाचार की ऐसी गाथाओं का उदाहरण देश में इससे पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ आरोप ही नहीं बल्कि भ्रष्टाचार के पुख्ता सुबूत हैं। देश भर में भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐसा पुख्ता केस मैंने जीवन में पहली बार देखा।
वीरभद्र सिंह की ओर से खुद पर चले रहे ईडी और सीबीआई के मामलों में अरुण जेटली का हाथ होने का आरोप लगाने पर अपरोक्ष रूप से पलटवार करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि जब वह खुद भ्रष्टाचार में फंसते हैं और पकड़े जाते हैं, तो उसके लिए दिल्ली वालों को जिम्मेदार ठहराते हैं।
जेटली बोले, मोदी सरकार में नहीं, 2011 में पकड़ा गया था भ्रष्टाचार
जेटली ने कहा कि हर भ्रष्ट व्यक्ति जब फंस जाता है तो सोचता है कि अब बच के कैसे निकलूंगा। पैसे इकट्ठे कर बैंकों में पैसे जमा करवाने और निकालने का सुझाव क्या हमने उनको दिया था। जब आप पकड़े गए तो कहते हैं कि दिल्ली वाला फलां व्यक्ति फंसवा रहा है।
मोदी सरकार तो मई 2014 में सत्ता में आई। आप तो वर्ष 2011 में पकड़े गए थे। वर्ष 2011 से 2014 तक राजनीतिक कारणों से आप भ्रष्टाचार की मैनेजमेंट में सफल हो जाएं और आप सोचें कि हर सरकार भ्रष्टाचार में आपकी मदद करेगी ऐसा नहीं हो सकता है।
बिना नाम लिए चुनौती देते हुए अरुण जेटली ने कहा कि जितने राजनीतिक नेताओं पर आज तक भ्रष्टाचार के आरोप लगे इससे ज्यादा पुख्ता आरोप और सुबूत मैंने अपने जीवन में कभी नहीं देखे।
कांग्रेस की कलह पर भी जेटली का निशाना
जेटली ने कहा कि कांग्रेस सरकार में कलह चरम पर है। यहां तो मंच पर कौन बैठेगा, कौन परिषद में जाएगा इसको लेकर ही नेताओं में कलह है। उन्होंने कहा कि हिमाचल में एक साल कांग्रेस और एक साल भाजपा की सरकार आने की परंपरा को खत्म करना होगा। भाजपा को यह मिथक तोड़ना होगा। हिमाचल में कुशासन की पराकाष्ठा है। देश के इतिहास में यह सबसे भ्रष्ट सरकार है। जिसके खिलाफ आरोप भी हैं और सुबूत भी।
जेटली ने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य को केंद्र सरकार दोनों हाथों से खुलकर वित्तीय सहायता दे रही है। मनमोहन सरकार के मुकाबले मोदी सरकार ने पिछले बजट में हिमाचल को दो गुणा ज्यादा वित्तीय सहायता दी लेकिन प्रदेश सरकार में न तो काम करवाने की काबलियत है और न ही पूरी क्षमता। इसी कारण केंद्र की परियोजनाओं की डीपीआर तक कांग्रेस सरकार से नहीं बन पा रही है। हिमाचल में कांग्रेस सरकार दिशाहीन और क्षमताहीन है।