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अरुण धूमल का खुलासा, सरकार ने विदेशी सेब पौधों की बिक्री में किया फर्जीवाड़ा

Wed, 27 Sep 2017 05:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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चुनाव से ठीक पहले नेता प्रतिपक्ष प्रेमकुमार धूमल के बेटे अरुण धूमल ने सरकार पर विदेश से आयात और सब्सिडी पर बेचे सेब पौधों के वितरण में बड़े फर्जीवाड़े के आरोप लगाए हैं।
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केंद्र की मिशन फॉर इंटिग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हार्टिकल्चर (एमआईडीएच) योजना में बागवानी विभाग ने 25 हजार सेब और चार हजार से अधिक नाशपाति के पौधे विदेशों से आयात किए।

जनवरी में 250 रुपये प्रति पौधा एक बागवान को अधिकतम 50 पौधे बेचे गए। आरोप लगाया कि विभाग ने जिन किसानों को पौधे बेचने की लिस्ट जारी की है, उनमें अधिकांश को पौधे मिले ही नहीं हैं। 
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बागवानों को तो पौधे मिले ही नहीं

उन्होंने पत्रकारों को लाभार्थी लिस्ट में दर्शाए कुछ बागवानों के ऑडियो और वीडियो क्लिप भी सुनाए। इसमें उन्होंने पौधे नहीं मिलने की बात कही है। उन्होंने मामले में बागवानी विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप लगाया। केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन को पत्र लिखकर सीबीआई जांच की मांग उठाई है।

आशियाना में पत्रकार वार्ता के दौरान अरुण ने कहा कि विभाग ने गेल गाला, जेरोमाइन, स्कारलेट स्पर वैरायटी के लगभग डेढ़ करोड़ के पौधे आयात किए थे। प्रति पौधा 471 रुपये की दर पर नौणी यूनिवर्सिटी ने खरीदा। इस पर शासन ने सब्सिडी देकर 250 रुपये की दर से बेचने के निर्देश दिए।

कुछ लोगों से मुख्यमंत्री के क्षेत्र रामपुर और ननखड़ी में विदेशी सेब के पौधे मिलने वाले लाभार्थियों की फील्ड वेरिफिकेशन करवाई तो पता चला कि जिन बागवानों के नाम लिस्ट में हैं, उनमें अधिकांश को पौधे मिले ही नहीं। कहा कि सरकार को अधिकारियों पर कार्रवाई करने के साथ बागवानी मंत्री से इस्तीफा लेना चाहिए।

मुख्यमंत्री के बगीचे में लगे 35 सौ पौधे

धूमल ने कहा कि लाभार्थी लिस्ट में फर्जीवाड़े की वजह मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का बगीचा है। उनके बगीचे में जाकर माली से बातचीत का वीडियो भी अरुण ने जारी किया। माली ने स्वीकार किया कि यहां सारी वैरायटी के पौधे लगे हैं।

कहा कि वीरभद्र सिंह के बगीचे का माली कह रहा है कि इस साल वहां 35 सौ नए पौधे लगाए गए हैं। कहा कि लालू के चारे घोटाले की तरह से सीएम वीरभद्र ने सेब पौधों का घोटाला किया है। आरोप लगाया कि सीएम अफसरों पर दबाव बनाते हैं और उनसे गलत कार्य करवाते हैं।
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भाजपा नेता बरागटा को मिले हैं पौधे

पूर्व बागवानी मंत्री नरेंद्र बरागटा ने भी योजना के तहत सेब के पौधे खरीदे हैं। सूची में पूर्व मंत्री का नाम होने पर अरुण से पूछा कि बरागटा ने भी पौधे खरीदे हैं या उनके नाम भी फर्जी हैं।

धूमल ने कहा कि बरागटा बागवान हैं, इसलिए उन्होंने पौधे लिए। नरेंद्र बरागटा के बेटे चेतन बरागटा ने कहा कि उन्हें पौधे मिले हैं। बागवान के लिए अधिकतम पचास पौधे दिए जाने हैं, उतने ही उन्हें मिले।

नहीं लडूंगा चुनाव
अरुण धूमल बोले - चुनाव लड़ने की न कोई इच्छा है और न वे कभी चुनाव लड़ेंगे। यदि उन्हें पार्टी ने टिकट दे भी दिया तो वे पार्टी का धन्यवाद करते हुए टिकट वापस कर देंगे। कहा कि उनके परिवार से पहले ही दो-दो सदस्य सक्रिय राजनीति में हैं।

ऐसे में यदि वे भी राजनीति में आ गए तो फिर उन पर भी परिवारवाद की राजनीति का आरोप लगेगा। उनका कहना था कि इससे उनके पिता की मॉरल अथॉरिटी भी कम हो जाएगी। इसलिए वे नहीं चाहते कि चुनाव में उतरें। वे एक कार्यकर्ता की तरह कार्य करेंगे।
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