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'सीएम के बेटे को ही दे दिया ऑफिस चमकाने का ठेका'

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पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के छोटे बेटे अरुण धूमल ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से 20 करोड़ रुपये का हिसाब मांगा है। धूमल ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, उनके बेटे विक्रमादित्य और वकामुल्ला चंद्रशेखर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वीरवार को पत्रकारों से बातचीत में अरुण ने कहा कि वीरभद्र और उनके परिवार के सदस्यों के पास लगभग 20 करोड़ रुपये कहां से आए।
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मुख्यमंत्री को इसे जनता को बताना चाहिए। आरोप लगाया कि 6.15 करोड़ रुपये आयकर रिटर्न, 7.70 करोड़ रुपये कर्ज और 5.41 करोड़ रुपये दिल्ली के महरौली में जमीन खरीदने में हेरफेर की गई है। उन्होंने बताया कि आयकर विभाग के 30 जून 2014, जुलाई 2014 और अगस्त 2014 के सर्वे/सर्च अभियान में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।

अरुण ने बताया कि वीरभद्र परिवार की ओर से दिल्ली के महरौली स्थित जो फार्म हाउस खरीदा गया है, रजिस्ट्री में उसकी कीमत महज 1.20 करोड़ दर्शाई गई है। आयकर विभाग ने जब इसकी पड़ताल जमीन बेचने वाले से की, तब यह तथ्य सामने आया कि जमीन का सौदा 6.61 करोड़ रुपये में किया गया। 1.20 करोड़ रुपये चेक और 5.41 करोड़ रुपये कैश के जरिये मिले। यह कैसे और कहां से आए।
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ऑफिस रेनोवेशन का ठेका
अरुण धूमल ने दावा किया कि वकामुल्ला ने अपनी घाटे में चल रही कंपनी के लिए आईपीओ लाया। इससे 16 करोड़ से अधिक धन जुटाया गया। आईपीओ लाने का एक उद्देश्य ऑफिस रेनोवेशन शो किया गया। ऑफिस रेनोवेशन करने का ठेका मुख्यमंत्री के बेटे विक्रमादित्य की कंपनी को 1.20 करोड़ में दिया गया।

सीएम से पूछे ये सवाल

अरुण ने दावा किया कि आयकर की ही जांच में यह तथ्य सामने आया कि वकामुल्ला ने जो वीरभद्र सिंह को कर्ज दिया है, वह कमाई मिर्ची की खेती से दर्शाई गई। इस पर आयकर विभाग ने वकामुल्ला से उस जमीन के कागजात मांगे। वकामुल्ला ने आयकर विभाग को जो कागज दिए, उनके आधार पर टीम ने जांच की।

जांच में यह आया कि विशाखापटनम में यह जमीन किसी महिला के नाम पर है। टीम ने महिला से पूछताछ की। महिला ने बताया कि वकामुल्ला चंद्रशेखर नाम के किसी व्यक्ति को वह जानती ही नहीं है। वकामुल्ला नाम का एक किरायेदार है।

टीम ने उससे भी पूछताछ की, जिसमें उसने बताया कि अपने रिश्तेदार वकामुल्ला चंद्रशेखर को सस्ते में जमीन बेचने के लिए यह कागजात दिए थे। उन्होंने मुख्यमंत्री को खुली बहस की चुनौती दी। कहा कि जब चाहे मुख्यमंत्री केवल फोन करके स्थान बता दें। वह बहस करने के लिए तैयार हैं।

सीबीआई, ईडी से जांच कराने की मांग

अरुण धूमल ने 20 करोड़ की गुत्थी को सुलझाने के लिए सीबीआई और ईडी से जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यही दो एजेंसियां हैं, जो निष्पक्ष जांच कर सकती हैं। हालांकि यह भी कहा कि प्रदेश में एक ही विभाग काम कर रहा है, वह है विजिलेंस। उसे भी इसे चेक करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जो समन मुझे आ रहे हैं, ढाई साल बाद वही समन मुख्यमंत्री, उनके बेटे और परिवार के सदस्यों को आएंगे। भाजपा की चार्जशीट में ये सारे मामले रखे जाएंगे।

पावर प्रोजेक्ट देने की साजिश
अरुण ने आरोप लगाया कि साई कोटी पावर प्रोजेक्ट को वेंचर एनर्जी एंड टेक्नालॉजी को देने के लिए साजिश रची जा रही है। इस प्रोजेक्ट को पहले भी उक्त कंपनी को दिया जा चुका है, जिसे बाद में निरस्त कर दिया गया था। 2007 में तत्कालीन अफसर और मंत्री भी ऐसी ही साजिश में शामिल थे। तब के मंत्रियों को अब चेयरमैन के पद से नवाजा गया है।
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अनुराग मेरे बेटे के समान : वीरभद्र

वहीं, धर्मशाला में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि अनुराग ठाकुर मेरे बेटे के समान है। उनसे बात मेरा बेटा विक्रमादित्य ही करेगा। जगरांगल में अनौपचारिक वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने यह बात अनुराग ठाकुर की ओर से उन्हें खुली बहस की चुनौती देने के प्रश्न का जवाब देते हुए कही। उन्होंने कहा कि शिमला के कटासनी में सरकार जल्द ही स्टेडियम बनाएगी।

भाजपा की ओछी राजनीति के कारण ही यहां स्टेडियम बनाने में देरी हुई। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोगों को एलईडी बल्ब जल्द ही दिए जाएंगे। इससे काफी बिजली बचत होगी। इससे पहले मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सिद्धबाड़ी में 3.30 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले फारेंसिंक विभाग के आवासीय परिसर की आधारशिला रखी।

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि आपराधिक मामलों के समाधान के लिए जुग्गा, मंडी और धर्मशाला फोरेंसिंक लैब के हर विभागों में आधुनिक उपकरण और मशीनें मुहैया करवाई जाएंगी। इसके लिए बजट स्वीकृत कर दिया जाएगा। बिलासपुर में जिला मोबाइल फोरेंसिंक यूनिट इसी माह से शुरू होंगी। इससे अपराधिक मामले तुरंत सुलाए जा सकेंगे।
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