काफी मशक्कत के बाद नेपाली मजदूरों ने झील को तोड़ा। अब झील का पानी 6.7 मीटर तक नीचे उतर गया है।
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पिछले कई दिन से किन्नौर जिले के उरनी ढांक के पास कृत्रिम झील बनने से पुल के लिए पैदा हुआ खतरा टल गया है। काफी मशक्कत के बाद नेपाली मजदूरों ने झील को तोड़ा। अब झील का पानी 6.7 मीटर तक नीचे उतर गया है।
चोलिंग में बनी कृत्रिम झील टूटने से स्थिति सामान्य हो गई है। इससे दोनों पुल खतरे से बाहर हो गए हैं। वीरवार शाम को साढ़े सात बजे के बाद झील में एक और ब्लास्टिंग की गई। इसके बाद सतलुज नदी का पानी और अधिक बढ़ गया था।
पानी बढ़ने के कुछ ही घंटों बाद कृत्रिम झील धीरे-धीरे टूटने लगी और पानी सात मीटर कम हो गया। यहां झील बनने से नेशनल हाईवे में बना वैकल्पिक मार्ग डूब गया था। वैकल्पिक मार्ग में चोलिंग की ओर बना पुल डूबने की कगार पर था।
झील टूटने के बाद पानी में डूबा हुआ पुल बच गया है। चोलिंग की ओर बने पुल को एक मीटर ऊंचा उठा दिया गया है। उधर, नेशनल हाईवे के कनिष्ठ अभियंता मोहन मेहता ने कहा कि कृत्रिम झील को तोड़ दिया गया है। इससे झील का पानी निकल गया है। अब दोनों पुल सुरक्षित हैं। जल्द मार्ग को यातायात के लिए बहाल किया जाएगा।