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क्या बात! अब बॉर्डर पर सेना भी होगी हाइटेक

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देश की सरहदों को सड़क से जोड़ने के मुहिम के बीच रक्षा मंत्रालय अब सेना के लिए हाई स्पीड दूरसंचार नेटवर्क को भी मजबूत कर रहा है। बार्डर एरिया में तैनात भारतीय सेना अब ऑप्टिकल फाइबर केबल के जरिये 4 जी सेवा से लैस होगी। रक्षा मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट को नीड फॉर स्पीड का नाम दिया है। इसके तहत देश में दुर्गम क्षेत्रों में तैनात सेना के लिए करीब 10 हजार किलोमीटर लंबी ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा रही है।
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अरबों रुपये के इस सामरिक महत्व के प्रोजेक्ट को रक्षा मंत्रालय ने आगामी दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसी प्रोजेक्ट के तहत हिमाचल और जम्मू के लेह-लद्दाख से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा में तैनात सेना के ट्रांजिट तथा बेस कैंपों के लिए 4 जी नेटवर्क की ओएफसी बिछाने का का काम शुरू हो गया है।

बॉर्डर एरिया से सटे ग्रामीण क्षेत्रों को भी लिंक करने की योजना

हिमाचल और लद्दाख के लिए ये केबल लाइन चंडीगढ़ से बिछाई जा रही है। चंडीगढ़ से एक लाइन शिमला, किन्नौर और स्पीति घाटी हो कर गुजरेगी, जबकि दूसरी लाइन चंडीगढ़-बिलासुपर, मंडी, कुल्लू-मनाली और रोहतांग होते हुए सरचू की तरफ जाएगी। यह दोनों लाइनें लाहौल के ग्रांफू में मिलेंगी।

इसी 4 जी सेवा से बॉर्डर एरिया से सटे ग्रामीण क्षेत्रों को भी लिंक करने की योजना है। चंडीगढ़ से सरचू तक केबल लाइन बिछाने का टेंडर आवंटित हो गया है। हिमाचल से गुजरने वाले इस प्रोजेक्ट का काम जेनेसिस इंटरनेशनल और विजया टेली कम्युनिकेशन कंपनियों को मिला है।
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बर्फबारी के चलते छह माह तक कट जाते हैं सीमावर्ती इलाके

हिमाचल और जम्मू के सीमावर्ती इलाके बर्फबारी के चलते छह माह तक देश-दुनिया से कट जाते हैं। सड़क के अलावा दूरसंचार सेवा भी ठप हो जाती है। अलग दो भूमिगत लाइनें बिछाने के पीछे सेना का मकसद है कि बार्डर से सटे इन क्षेत्रों में 12 महीने दूरसंचार सेवा दुरुस्त रहे।

बीएसएनएल हिमाचल सर्किल के डीजीएम प्रोजेक्ट हरीश कुमार ने बताया कि चंडीगढ़ से हिमाचल के बॉर्डर तक फोर जी सेवा के लिए ओएफसी बिछाने का काम चल रहा है। मौसम ने साथ दिया तो इसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
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