क्योंकि, करीब 14 किलोमीटर पैदल चलकर उन्हें गांव पहुंचना पड़ता है। अब तो कच्ची सड़क का भी नामोनिशान मिट गया है। सड़क न होने से पंचायत की 5500 जनसंख्या को परेशानी हो रही है। क्षेत्र को सड़क सुविधा न मिलने से 54 परिवार पलायन कर चुके हैं। इसमें अधिकतर परिवार ऐसे हैं, जिनके बुजुर्ग बीमार थे या उनके बच्चों को पैदल स्कूल जाने में दिक्कतें पेश आती थी।
ठाकुर ने कहा कि वह आम आदमी बनकर सड़क समस्या लेकर गए थे। लेकिन, उपायुक्त ने उनकी समस्या सुनने की बजाए टालने का प्रयास किया। ऐसे में उन्होंने उपायुक्त को केवल यही कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते समस्या लेकर आए हैं।
उसका आप मंच के ऊपर हल करें या फिर हमें नीचे उतारकर। वहीं, खाद्य आपूर्ति मंत्री किशन कपूर ने मामले में एक्सईएन लोक निर्माण विभाग और डीएफओ देहरा को जेसीबी ले जाकर तुरंत सड़क का काम पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही ग्रामीणों को शांत करते हुए कहा कि आपकी समस्या का शीघ्र समाधान होगा।
अमर उजाला ने भी उठाया था सड़क का मामला- धार लुणसू गांव में सड़क की समस्या का मुद्दा 20 फरवरी 2017 को अमर उजाला ने भी प्रमुखता से उठाया था। अमर उजाला की टीम ने गांव में जाकर क्षेत्र की समस्याओं को लेकर ग्राउंड रिपोर्ट की थी। इसमें लोगों ने सड़क समस्या को टीम के समक्ष रखा था।
जनमंच में लोग समस्या लेकर आते हैं। भीड़ में लोग अपनी बात ठीक से नहीं रख पाते। मंच पर अव्यवस्था न बने, इसलिए मंच पर भीड़ जमा न करने के लिए कहा गया ताकि सभी की समस्याओं को आराम से सुना जा सके। - संदीप कुमार, उपायुक्त कांगड़ा