हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के पूर्व पदाधिकारियों ने कर्मचारियों को मिल रहे सेवाविस्तार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्व पदाधिकारियों का आरोप है कि सिर्फ कांग्रेस विचारधारा वाले कर्मचारियों को ही सेवा विस्तार दिया जा रहा है। पूर्व अध्यक्ष प्रेम सिंह भदौरिया और पुरुषोत्तम गुलेरिया ने कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय रिटायर्ड, टायर्ड, फायर्ड और हायर्ड अधिकारियों की शरण स्थली बन चुका है।
यहां आम आदमी की आवाज सुनाई नहीं देती है। कहा कि सरकार की इस मनमानी के चलते ईमानदार और साफ छवि वाले कर्मचारियों की पदोन्नति प्रभावित हो रही है। उन्होंने सरकार पर 4-9-14 विशेष वेतन वृद्धि, रिटायरमेंट की आयु बढ़ाने, सेवा विस्तार आदि मामलों पर राजनीति करने का आरोप लगाया।
गुलेरिया ने कहा कि सरकार बनने के साढ़े चार साल के बाद भी प्रदेश में राजनीतिक आधार पर कर्मचारियों के तबादले हो रहे हैं। कर्मचारियों का उत्पीड़न अभी बंद नहीं हुआ है। हिमाचल में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को हाशिये पर रख दिया गया है। गुड गवर्नेंस का नारा देने वाली कांग्रेस सरकार किसानों, बागवानों, श्रमिकों, कर्मचारियों और आम आदमी के लिए कुछ नहीं कर पाई, उलटे
ईमानदारी और कर्मठता से कार्य करने वाले कर्मचारियों को ठिकाने लगाया जा रहा है। वहीं, दोनों नेताओं ने सरकार के बेरोजगारी भत्ता देने के एलान को भ्रम करार दिया है। कहा कि वीरभद्र सिंह सरकार ने प्रदेश के लाखों युवाओं को उलझाने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार बेरोजगारी भत्ते पर गंभीर थी तो इसे चुनाव के पहले वर्ष में क्यों लागू नहीं किया गया। उन्होंने मांग की है कि सरकार बेरोजगारों को पांच साल के एरियर साहित बेरोजगारी भत्ते का भुगतान करे।