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'बेरोजगारी भत्ता के नाम पर वीरभद्र सरकार ने ठगे बेरोजगार युवा'

Wed, 01 Mar 2017 10:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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बेरोजगारी भत्ते को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच बयानबाजी के बीच अब कर्मचारी नेता भी इस विवाद में कूद पड़े हैं। प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष प्रेम सिंह भरमौरिया और पुरुषोत्तम गुलेरिया ने वीरभद्र सरकार पर लाखों पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं को ठगने का आरोप लगाया है।
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उन्होंने कहा कि सरकार जहां सरकारी नियुक्तियों में भेदभाव बरत रही है, वहीं चुनाव घोषणापत्र में बेरोजगारी भत्ता देने के वायदे से भी मुकर गई है। उन्होंने मांग की है कि प्रदेश सरकार युवाओं को दिसंबर 2012 से एरियर सहित बेरोजगारी भत्ते का भुगतान तुरंत करे। पूर्व अध्यक्ष प्रेम सिंह भरमौरिया ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने चुनाव घोषणापत्र में कर्मचारियों के लिए कई वायदे किए थे।

साथ ही बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता देने का भी वायदा भी किया था। चुनाव में युवाओं का वोट हासिल कर मतलब निकालने के बाद अब सरकार युवाओं से बेरोजगारी भत्ते के नाम पर कौशल विकास भत्ता देने की बात कर रही है, जबकि यह योजना पूरी तरह विफल हो चुकी है।
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वहीं, पुरुषोत्तम गुलेरिया ने कहा कि साढ़े चार साल तक प्रदेश के लाखों युवा बेरोजगारी भत्ते का इंतजार करते रहे, लेकिन अपने कार्यकाल के आखिरी 6 माह में वीरभद्र सिंह सरकार अपने वायदे से पलट गई। उन्होंने कांग्रेस विचारधारा वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को लगातार सेवा विस्तार देने पर भी सवाल उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसा क्यों हो रहा है कि कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों को बार बार सेवा विस्तार मिल रहा है, जबकि कई कर्मचारी प्रोमोशन न मिलने के कारण एक ही पद से रिटायर हो रहे हैं। कहा कि स्थिति यह है कि मुख्यमंत्री कार्यालय वृद्धाश्रम बन चुका है।

बेरोजगारी भत्ता देने से मुकर चुके हैं वीरभद्र सिंह: धूमल

पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि मुख्यमंत्री और कांग्रेस संगठन का आंतरिक संघर्ष चरम पर पहुंच चुका है। संगठन और मुख्यमंत्री एक-दूसरे को नीचा दिखाने के खेल में इस कदर मशरूफ  है कि जनता से किए वायदों को पूरा करने के बजाय उन्हीं वायदों को पासों की तरह इस्तेमाल कर सत्ता और संगठन पर कब्जा करने की चालें चल रहे हैं। 

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कांग्रेस संगठन और मुख्यमंत्री में चल रहे इस संघर्ष को भले ही कांग्रेस अपना आंतरिक मामला कहे, लेकिन जनहित के जिस मुद्दे की आड़ में सत्ता कब्जाने का यह खेल खेला जा रहा है, वह अब सार्वजनिक मामला हो चुका है। जिस घोषणा पत्र और बेरोजगारी भत्ते को मुख्यमंत्री नकार चुके हैं क्या मुख्यमंत्री उन्हीं अनुभवहीन लोगों के आगे झुकते हुए अपनी साख को दांव पर लगाकर बेरोजगारी भत्ते को प्रदेश में लागू करेंगे? 

प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि आने वाले दिनों में राजनीतिक विश्लेषकों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण रहेगा कि कांग्रेस का संगठन जो अब तक मुख्यमंत्री के मनमाने निर्णयों के आगे सिर झुकाकर चुपचाप अपमान सहता आया है क्या अब वह बदली हुई परिस्थितियों में मुख्यमंत्री को झुकाकर अपना निर्णय मनवाने के लिए मजबूर कर पाएगा या फिर सातवीं बार मुख्यमंत्री

बनने का दावा करने वाले प्रदेश के सबसे वरिष्ठ नेता एक बार फिर अपना निर्णय संगठन पर थोप कर अपनी धाक कांग्रेस में साबित कर पाएंगे ? या फि र कांग्रेस संगठन के आगे आत्मसमर्पण कर अपनी राजनीतिक पारी की साख को दांव पर लगा देंगे।

बेरोजगारी भत्ता और अवैध खनन मामले में सरकार को घेरेगा विपक्ष

भाजपा विधानसभा में बेरोजगारी मुद्दे पर सत्ता पक्ष को घेरेगी। मंगलवार को पीटरहॉफ में आयोजित भाजपा विधायक दल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। इसके अलावा हिमाचल में शराब, खनन, कानून व्यवस्था, विकास कार्यों की डीपीआर न बनाया जाना, भू-माफिया जैसे मुद्दों पर भी भाजपा सरकार के खिलाफ हल्ला बोलेगी। हिमाचल बजट सत्र बुधवार से शुरू हो रहा है।

वीरवार से भाजपा विधानसभा में आक्रामक रुख अपनाएगी। बैठक की अध्यक्षता नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने की। भाजपा विधायक दल के मुख्य सचेतक सुरेश भारद्वाज ने कहा कि हिमाचल में सड़कों की हालत दयनीय है। सरकार करोड़ों के कर्जों में डूबी है और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह घोषणाओं पर घोषणाएं कर रहे हैं। विभागों में रिक्त पद पड़े हैं।

स्कूलों में भी अध्यापकों की कमी चल रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को योजनाओं को प्रदेश सरकार लागू नहीं कर रही है। विकास कार्यों की डीपीआर लंबित है। केंद्र सरकार ने हिमाचल को 61 एनएच दिए हैं, लेकिन आज तक इस पर सरकार की ओर से काम नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार को सत्ता में रहते हुए चार साल से अधिक समय हो गया है, लेकिन हिमाचल में विकास नजर नहीं आ रहा है। अब जब हिमाचल में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं तो सरकार की ओर से चुनावी घोषणाएं की जा रही हैं।
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वायदों से मुकरना मुख्यमंत्री की पुरानी आदत: अनुराग

सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि वायदों से मुकरना मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पुरानी आदत है। कहा कि बेरोजगारी भत्ते के मुद्दे पर मुख्यमंत्री अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकते। कांग्रेस के 2012 के चुनाव घोषणापत्र में बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता देने की बात की गई थी। वीरभद्र सिंह का यह कहना गलत है कि शांता कुमार या प्रेम कुमार धूमल ने बेरोजगारी भत्ता क्यों नहीं दिया? 

अनुराग ठाकुर बोले - कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में बेरोजगारों को 1000 से 1500 रुपये प्रतिमाह बेरोजगारी भत्ता देने की बात की थी। सत्ता में आने के बाद अपने घोषणापत्र को नीतिगत दस्तावेज बनाया था, इसलिए भाजपा जवाब चाहती है कि यह योजना अभी तक लागू क्यों नहीं की गई। केंद्र सरकार का कौशल विकास भत्ता देकर बेरोजगारों को क्यों छला गया? 

अनुराग ने कहा कि मुख्यमंत्री का यह कहना कि वे घोषणापत्र बनाने वाले समिति में नहीं थे, यह भी तथ्यों से विपरीत है। उन्हें चुनावों से 2 महीने पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया था। घोषणापत्र उसके बाद जारी हुआ था तो क्या मुख्यमंत्री यह कहना चाहते हैं कि उनके सहमति के बगैर कांग्रेस ने घोषणापत्र में बेरोजगारी भत्ता देने का वादा किया था? 

शिमला में जब घोषणापत्र तत्कालीन केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने जारी किया था, उस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह भी मौजूद थे। इसलिए वीरभद्र सिंह को अब जनता को और ज्यादा गुमराह नहीं करना चाहिए और अपने वादे के मुताबिक बेरोजगारी भत्ता देना चाहिए।
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