पूर्व सैनिकों को कल्याण योजनाओं का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। कल्याण योजनाओं के लिए आवेदन करने को सबसे पहले ऑनलाइन पंजीकरण करना अनिवार्य होगा। इसके लिए पूर्व सैनिक कल्याण बोर्ड ने अधिसूचना जारी कर दी है। पहले पूर्व सैनिक योजनाओं का लाभ लेने को ऑफलाइन आवेदन करते थे।
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अब केंद्रीय सैनिक कल्याण बोर्ड की वेबसाइट पर ऑनलाइन पंजीकरण के उपरांत पूर्व सैनिक विभिन्न योजनाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन पंजीकरण के लिए ई-मेल आईडी, फोन नंबर, बैंक खाता नंबर, डिस्चार्ज बुक, आधार कार्ड, पहचान पत्र सहित अन्य जरूरी दस्तावेज भी अपलोड करने होंगे।
पंजीकृत होने के बाद पूर्व सैनिक किसी भी योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन के बाद संबंधित जिले के पूर्व सैनिक कल्याण बोर्ड के उपनिदेशक कार्यालय में मीटिंग तय होगी। यहां संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाएगी। इसके बाद सैनिक निदेशालय के माध्यम से संबंधित योजना का लाभ सीधा बैंक खाते में पहुंचेगा।
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विभिन्न कल्याण योजनाओं का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य है। पंजीकरण के बाद किसी भी योजना का लाभ लिया जा सकता है। सभी पूर्व सैनिकों को केंद्रीय सैनिक बोर्ड की वेबसाइट पर ऑनलाइन पंजीकरण करना अनिवार्य है। -ब्रिगेडियर एसके वर्मा, निदेशक पूर्व सैनिक कल्याण बोर्ड हमीरपुर
अब ऑनलाइन चालान से जमा होगा पैसेंजर, गुड्स टैक्स
अब पैसेंजर और गुड्स टैक्स ऑनलाइन जमा किया जा सकेगा। मैनुअल चालान की जगह ई चालान से टैक्स की राशि बैंक में जमा होगी। जुलाई से यह सुविधा शुरू है। अब तक मैनुअल चालान से पैसेंजर और गुड्स टैक्स जमा होता था।
आबकारी एवं कराधान विभाग से निशुल्क चालान लेकर वाहन ऑपरेटर गुड्स और पैसेंजर टैक्स बैंक शाखा में जमा करवा देते थे, लेकिन अब ऑपरेटरों को ई चालान लेना होगा। इसका प्रिंट लेने के बाद ही बैंक शाखा में टैक्स जमा होगा।
हालांकि शुरूआत में ई-चालान से टैक्स जमा करवाने के लिए ऑपरेटरों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा, लेकिन ई-चालान से टैक्स जमा करवाने का रिकॉर्ड ऑनलाइन रहेगा। इतना ही नहीं ई-चालान पर वाहन मालिक ओवर राइटिंग भी नहीं कर पाएंगे। ऐसे में ई-चालान से डिफाल्टर वाहन मालिकों पर भी शिकंजा कसा जा सकेगा।
वाहन मालिकों के जेब पर बोझ
इलेक्ट्रॉनिक चालान का प्रिंट ऑनलाइन काटा जा रहा है। इसका प्रिंट लेने के लिए साइबर कैफे संचालक मनमाने दाम वसूल रहे हैं। एक चालान प्रिंट के 50 से सौ रुपये वसूले जा रहे हैं, जबकि मैनुअल चालान का कोई पैसा नहीं लगता था।
ऐसे में ई-चालान की सुविधा शुरू होने से वाहन मालिकों को अतिरिक्त पैसे भरने पड़ रहे हैं। वाहन मालिकों ने विभाग से मांग की है कि ई-चालान का प्रिंट आबकारी एवं कराधान विभाग या सुगम केंद्रों में सस्ती दरों पर उपलब्ध करवाया जाए।
पैसेंजर और गुड्स टैक्स पहले मैनुअल चालान से जमा किया जाता था, लेकिन अब टैक्स ई-चालान के माध्यम से जमा किया जा रहा है। - हरदेव सिंह देहल, ईटीओ हमीरपुर
जल्द शुरू होगी मुख्यमंत्री आवास योजना
हिमाचल में सामान्य गरीब वर्ग के लोगों को प्रदेश सरकार आवास बनाने के लिए पैसा देगी। इसके लिए जल्द ही मुख्यमंत्री आवास योजना शुरू होगी। ग्रामीण विकास विभाग ने वित्त विभाग से क्लेरिफिकेशन मांगी है। पूछा गया है कि किस आधार पर सामान्य वर्ग के गरीब लोगों को पैसा दिया जाए। केंद्र सरकार प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत गरीबों को 1.30 लाख रुपये दे रही है।
क्या सामान्य वर्ग के गरीबों को भी इसी आधार पर पैसे का आवंटन किया जाए? बता दें कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बजट भाषण में सामान्य वर्ग के गरीब लोगों को आवास देने की योजना का एलान किया था। हिमाचल में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अभी बीपीएल लोगों को आवासीय सुविधा दी जाती है। राजीव गांधी आवास योजना के तहत भी गरीब लोगों को घरों का आवंटन किया जाता है।
ऐसे होगा चयन
सामान्य गरीब वर्ग के लोगों का चयन पंचायतों की ग्राम सभाओं में होगा। ग्राम सभा से प्रस्ताव पारित कर बीडीओ को भेजा जाएगा। डीसी के माध्यम से यह प्रस्ताव सरकार को जाएगा। यहां से स्वीकृति के बाद बीडीओ के माध्यम से पैसा जारी होगा।
हिमाचल में मुख्यमंत्री आवास योजना शुरू की जा रही है। वित्त विभाग को क्लेरिफिकेशन के लिए पत्र भेजा गया है। इसमें वित्त विभाग से पूछा गया है कि कितने पैसे आवास बनाने को दिए जा सकते हैं। -सी सेलवम, निदेशक ग्रामीण व पंचायतीराज विकास विभाग
संसद में कैंपा बिल पास होने के बाद हिमाचल की झोली में करीब चौदह सौ करोड़ रुपये आएंगे, लेकिन इस पूरी राशि को प्रदेश वन विभाग अभी भी सिर्फ दस फीसदी प्रति वर्ष के हिसाब से ही खर्च कर सकेगा। सुप्रीमकोर्ट के निर्देशों के चलते विभाग इस फंड को मनमर्जी से खर्च नहीं कर सकेगा। अभी भी इस फंड को खर्च करने के लिए तीन स्तर पर मंजूरी और रिव्यू से गुजरना पड़ेगा।
कैंपा फंड के तहत प्रदेश को किसी भी औद्योगिक इकाई लगने की एवज में इकाई की ओर से जो राशि मिलती थी, उसे पर्यावरण को संरक्षण देने और पौधरोपण के लिए खर्च किया जाता है। पूर्व व्यवस्था के तहत सिर्फ दस प्रतिशत राशि हर साल राज्यों को दी जाती थी, लेकिन अब बिल पास होने के बाद राज्यों को कुल नब्बे प्रतिशत राशि दे दी जाएगी।
इसके बाद राज्यों को केंद्र सरकार से कैंपा फंड से पैसा लेने के लिए मंजूरी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। हालांकि, साथ ही इस राशि के खर्च में पारदर्शिता की सीधी जिम्मेदारी राज्य की होगी। हालांकि, केंद्र भी अपने स्तर से इन फंड के खर्च पर निगरानी करता रहेगा।
तीन स्तर पर होगी फंड खर्च की मॉनीटरिंग
कैंपा फंड को खर्च करने के लिए तीन स्तर पर कमेटियों की स्क्रीनिंग होती है। पीसीसीएफ की अध्यक्षता वाली एग्जीक्यूटिव कमेटी इस मद में होने वाले कार्यों का सालाना प्लान तैयार कर उसे मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली स्टीयरिंग कमेटी को
भेजती है। स्टीयरिंग कमेटी का काम इन प्लानों को अप्रूवल देना, फंड खर्च की समीक्षा करना, नियम तय करना आदि होता है। इसके बाद मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गवर्निंग बॉडी होती है। इसके जिम्मे पॉलिसी बनाने और मॉनीटरिंग का काम होगा।
केंद्र और राज्य में होगा नब्बे-दस का बंटवारा
कैंपा फंड का बंटवारा केंद्र और राज्य के बीच नब्बे-दस के अनुपात में होगा। कुल 1550.21 करोड़ राशि है। इसमें मूल 1125.38 करोड़ के अलावा ब्याज के 424.82 करोड़ रुपये शामिल हैं। बिल पास होने के बाद अब हिमाचल को कुल 1395.19 करोड़ मिलेंगे। केंद्र सरकार को 155.02 करोड़ रुपये मिलेंगे।