फल मंडियों में जहां सेब थोक रेट पर 40 से 50 रुपये किलो बिक रहा है वहीं राजधानी के बाजारों में ग्राहकों को 160 रुपये किलो बेचा जा रहा है। सेब की कीमतों में भारी गिरावट का खेल रचकर एक तरफ जहां बागवानों को लूटा जा रहा है वहीं आम ग्राहकों की जेब भी ढीली की जा रही है। यही सेब दिल्ली के मॉल में एक किलो की पैकिंग कर 491 रुपये किलो भी बिक रहा है। बाजार में सेब की भारी मांग है, ग्राहक ताजा सेब मांग रहे हैं लेकिन मंडियों में खरीददार सेब की आपूर्ति में भारी बढ़ोतरी और मांग न होने के नाम पर बागवानों का सेब सस्ते रेट पर खरीद रहे हैं।
शिमला जिले की फल मंडियों में इन दिनों सेब का रेट 400 से 1800 रुपये प्रति पेटी चल रहा है। बढ़िया सेब की 30 किलो की पेटी औसतन 1200 से 1400 रुपये में मिल रही है। बागवान का सेब 45 रुपये प्रतिकिलो तक बिक रहा है। यही सेब जब मार्केट में पहुंचता है तो दाम तीन गुना बढ़कर 160 रुपये किलो तक पहुंच जाते हैं और जब दिल्ली के बड़े मॉल में एक किलो की प्लास्टिक की पैकिंग में बिकता है तो दाम 10 गुना बढ़ जाते हैं।
दिल्ली के एक मॉल में निजी कंपनी का लेबल लगा सेब 491 रुपये किलो बिक रहा है। रॉयल किस्म का यह सेब शिमला की मंडियों में बागवानों से औने पौने दामों पर खरीदा जाता है। मंडियों में सेब की थोक मार्केट में भारी गिरावट चल रही है, साल भर मेहनत के बाद बागवानों की लागत भी नहीं निकल रही। निजी कंपनियां सामान्य सेब को एक किलो की पैकिंग में पैक कर 500 रुपये किलो बेचकर मोटा मुनाफा कमा रही हैं।
बागवानों को लूट रहे कारपोरेट घराने : संजय
संयुक्त किसान मंच के सह संयोजक संजय चौहान ने कहा कि बड़े कारपोरेट घराने और कंपनियां बागवानों को लूट रही हैं। सरकार खामोश है। बागवानों से सस्ती दरों पर सेब खरीद कर कई गुणा अधिक कीमतों पर बेचा जा रहा है। सेब उत्पादन पर लागत दोगुना बढ़ गई है और किसान को कीमतें 5 साल पुरानी ही मिल रही है।
जिले की मंडियों में वीरवार को यह रहे सेब के दाम
भट्ठाकुफर 400-1800
नारकंडा 300-1800
पराला 400-1800
नेरवा 300-600
रोहड़ूू 300-1500
टापरी 400-1500
(नोट : यह 30 किलो की सेब पेटी के दाम हैं)