फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इथरेल की स्प्रे से बागवानों को करोड़ों का नुकसान

विज्ञापन
शिमला के लोअर बाजार में बिक रही है इथरेल।
विज्ञापन
शिमला। राजधानी शिमला सहित जिलाभर में रोक के बावजूद इथरेल (इथोफोन) धड़ल्ले से बिक रहा है। इथरेल की स्प्रे के बाद फसल झड़ने से बागवानों को करोड़ाें रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। बावजूद इसके इथरेल की बिक्री पर प्रतिबंध नहीं लग पा रहा। प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव फलों को अप्राकृतिक तरीके से पकाने वाले केमिकलों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए अधिकारियों को छापेमारी के आदेश दे चुके हैं, बावजूद इसके अधिकारियों के गंभीर न होने से सरेआम बीज और कीटनाशकों की दुकानों पर इथरेल बिक रहा है।
विज्ञापन

वीरवार को अमर उजाला की टीम ने इथरेल बेचने वाली दुकानों का जायजा लिया। शहर के व्यस्ततम लोअर बाजार की एक कीटनाशक की दुकान में दुकानदार से इथरेल मांगा तो दुकानदार ने फौरन काउंटर पर रखी बोतल की ओर इशारा कर दिया। दुकानदार ने बताया कि कई कंपनियां इथरेल बनाती हैं लेकिन उनके पास एक ही कंपनी का इथरेल मौजूद है। लोअर बाजार ही नहीं राजधानी शिमला में संजौली, ढली सब्जी मंडी सहित अन्य बाजारों में बेरोकटोक इथरेल बिक रहा है। सेब उत्पादक क्षेत्रों में धड़ल्ले से इथरेल बेचा जा रहा है। सेब में चटक लाल रंग के लिए बागवान अपने बागीचों में इथरेल (इथोफोन) हार्मोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। स्प्रे के दौरान इथरेल की अधिक मात्रा अथवा घटिया क्वालिटी के कारण फसल को नुकसान पहुंच रहा है। इथरेल बेचने वाली कंपनियां हर साल करोड़ों रुपये कमा रही हैं लेकिन बागवानों को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। इस सीजन के दौरान भी सेब की ड्रापिंग के कई मामले सामने आ चुके हैं।
मुख्य सचिव के समक्ष उठाया है मुद्दा : हरीश
हिमाचल फल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान ने कहा कि इथरेल से बागवानों को हर साल करोड़ों की चपत लग रही है। सरकार ने इथरेल बैन करने के आदेश भी दिए थे लेकिन यह प्रभावी ढंग से लागू नहीं हुए। संघ ने यह मामला मुख्य सचिव के समक्ष उठाया है। उम्मीद है कि फसल को नुकसान पहुंचाने वाले इथरेल को प्रतिबंध करने को लेकर अब कड़ाई बरती जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें