उधर, कुल्लू जिले में आई आपदा के बीच सेब सीजन का आगाज भी हो गया है। सड़कें बंद और बाढ़ से मची तबाही के डर से मंडियों में नए व्यापारी नहीं आ रहे हैं। व्यापारी कुल्लू में हालात सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।
हालांकि मंडियों में सेब सीजन शुरू हो गया है। लेकिन बाढ़ आने से पहले ही मंडियों में आ चुके व्यापारी ही सेब की खरीद कर रहे हैं। प्रतिस्पर्धा कम होने के कारण मार्केट में तेजी नहीं आई है। उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार, जम्मू, दिल्ली से आपदा के बाद नए व्यापारी नहीं आने से बागवानों को नुकसान उठाना पड़ा है। गौरतलब है कि प्लम और नाशपाती के सीजन के बाद सेब सीजन के रफ्तार पकड़ने की उम्मीद जताई जा रही थी। जुलाई के दूसरे सप्ताह में बारिश और ब्यास नदी में आई बाढ़ के बाद नुकसान हुआ। इसके कारण दिल्ली समेत दूसरे राज्यों से कुल्लू की ओर आने वाले व्यापारियों के कदम रुक गए हैं।
हालांकि अगस्त के पहले सप्ताह से सेब सीजन के रफ्तार पकड़ने की उम्मीद है। कुल्लू और मंडी के बीच नेशनल हाईवे की सड़क को भी सुधार लिया है। ऐसे में व्यापारियों के अगस्त के पहले सप्ताह में पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि बाहरी राज्यों के यह व्यापारी फोन पर संपर्क कर लगातार कुल्लू में सेब सीजन का अपडेट ले रहे हैं। सब्जी मंडी भुंतर में आढ़ती सोहन लाल ने कहा कि आपदा के बाद नए व्यापारी मंडियों में नहीं आए हैं। मंडियों में जब व्यापारियों के बीच सेब खरीदने के लिए प्रतिस्पर्धा रहती है तो बागवानों को सेब अच्छे दाम मिलते हैं। आने वाले दिनों में कुल्लू में बाहरी राज्यों के कुछ और व्यापारियों के पहुंचने की उम्मीद है।