हिमाचल में सेब सीजन समाप्त हो गया है। इस बार पिछले साल के मुकाबले एक करोड़ सेब पेटी कम उत्पादन हुआ है। इस साल राज्य में 2.60 करोड़ सेब पेटियां हुई हैं।
जबकि पिछले साल 3.69 करोड़ सेब पेटियां देश की विभिन्न मंडियों में पहुंचीं थी। कम उत्पादन मौसम की मार के चलते बताया जा रहा है।
राज्य में सेब सीजन इस बार जून के अंत में शुरू हो गया था। मंडी, कुल्लू और शिमला जिलों के निचले क्षेत्रों से सेब सबसे पहले मंडियों में पहुंचता है।
इसके बाद शिमला और कुल्लू जिलों के ऊंचे क्षेत्रों और अंत में किन्नौर के ऊंचे इलाकों का सेब बाजार में उतरता है। शुरू में अरली वैराइटी सेब को काफी अच्छे रेट मिले। बीच में रेट गिरे थे। बाद में खरीददारों में कम फसल का अनुमान होते ही सेब के दामों ने फिर उछाल पकड़ लिया।
जम्मू-कश्मीर में आई बाढ़ के चलते भी राज्य के बागवानों को अच्छे रेट मिले। इस बार 2.60 करोड़ पेटियां राज्य से बाहर मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, लखनऊ, चंडीगढ़ आदि मंडियों में गई हैं, वहीं लगभग 15 से 20 लाख पेटियों की खपत राज्य के भीतर हो गई हैं।
राज्य में ही करीब 20 लाख पेटियां बिक जाती हैं। हिमाचल प्रदेश बागवानी विभाग के निदेशक डॉ. गुरदेव सिंह ने कहा कि पैदावार का अंतिम आंकड़ा फील्ड से एकत्र किया जा रहा है।