करीब एक साल से न अच्छी बारिश हुई है न पूरी बर्फ गिरी है। इसके कारण पौधे सूखने लगे हैं। रोगग्रस्त पौधे पहले सूख रहे हैं। नए पौधे सूखने की भी सूचना मिल रही है। सूखे की स्थिति अगर ऐसी ही बनी रही तो इस साल की फसल पर भी बुरा असर पड़ सकता है।-लोकेंद्र सिंह विष्ट, अध्यक्ष, प्रोग्रेसिव ग्रोवर्स एसोसिएशन
विशेषज्ञों ने बागवानों को दी ये सलाह
बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि सूखे के प्रभाव के कारण फिलहाल बागवानों को बगीचों में छिड़काव से बचना चाहिए। कोई गंभीर बीमारी न दिखे तभी छिड़काव न करें। अगर छिड़काव करना बहुत जरूरी है तो पहले सिंचाई का बंदोबस्त जरूर कर लें।फ्रूट ड्रापिंग हो रही है तो सिंचाई की व्यवस्था करें, फल लगने के बाद पौधों को पानी की जरूरत बढ़ जाती है। पौधों के तौलिये में 4 से 6 इंच घास की मल्चिंग करें, इससे नमी अवशोषित नहीं होगी। बागवान प्लास्टिक मल्च का भी प्रयोग कर सकते हैं। प्लास्टिक मल्च पर सरकार अनुदान भी दे रही है।