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Shimla: सेब उत्पादकों ने एचपीएमसी मुख्यालय के बाहर किया प्रदर्शन, प्रबंध निदेशक को साैंपा ज्ञापन

Tue, 06 Jan 2026 05:29 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

एचपीएमसी मुख्यालय के बाहर भाजपा सेब उत्पादकों ने जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन की अगुवाई भाजपा नेता चेतन सिंह बरागटा ने की। प्रदर्शन के दौरान बागवानों ने एचपीएमसी के प्रबंध निदेशक को ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल कार्रवाई करने की मांग की।
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सेब उत्पादकों ने एचपीएमसी मुख्यालय के बाहर किया प्रदर्श - फोटो : संवाद
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विस्तार
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सेब उत्पादकों ने कांग्रेस सरकार की किसान-विरोधी नीतियों, सेब एमआईएस योजना में कथित अनियमितताओं समेत अन्य मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया। एचपीएमसी मुख्यालय के बाहर भाजपा सेब उत्पादकों ने जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन की अगुवाई भाजपा नेता चेतन सिंह बरागटा ने की। प्रदर्शन के दौरान बागवानों ने एचपीएमसी के प्रबंध निदेशक को ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल कार्रवाई करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उद्यान कार्ड होने के बावजूद किसानों से बार-बार राजस्व दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। उद्यान कार्ड में बागवानी से जुड़ा संपूर्ण डाटा पहले से उपलब्ध है। इससे किसानों को अनावश्यक परेशानियों, भुगतान में देरी और मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा है। सेब उत्पादकों ने एचपीएमसी पर गंभीर कुप्रबंधन का आरोप लगाया। उत्पादकों ने कहा कि कई क्षेत्रों में कलेक्शन सेंटर समय पर नहीं खोले गए, दैनिक लिफ्टिंग की सीमा तय कर दी गई और सड़क सुविधा होने के बावजूद ट्रक नहीं भेजे गए।

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इस वजह से 20 करोड़ का सेब सड़ गया। प्रदर्शन के दौरान पर्यावरणीय खतरे का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। सेब उत्पादकों ने आरोप लगाया कि सड़े हुए सेब को निर्धारित प्रक्रिया और पर्यावरणीय आकलन के बिना डंप कर दिया गया। इससे पर्यावरण और जनस्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा। एमआईएस योजना को लेकर यह भी आरोप लगाया गया कि विश्व बैंक की ओर से वित्तपोषित ऑनलाइन मॉड्यूल को जानबूझकर लागू नहीं किया गया। इससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। आज तक न तो अंतिम खरीद आंकड़े सार्वजनिक किए गए हैं और न ही वास्तविक नुकसान की जानकारी दी गई है। एचपीएमसी की वित्तीय स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। निगम के पास करीब 4,000 मीट्रिक टन बिना बिका सेब जूस कंसंट्रेट पड़ा है। इसकी अनुमानित कीमत 48 करोड़ बताई गई है जबकि एचपीएमसी पहले से ही करीब 80 करोड़ के घाटे में चल रहा है।
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चेतन बरागटा समेत अन्य सेब उत्पादकों ने मांग की कि पूरे मामले की विजिलेंस जांच करवाई जाए। सेब की बर्बादी, वित्तीय नुकसान और पर्यावरणीय उल्लंघन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। वर्ष 2023 में सेब फेंकने के आरोप में जिन बागवानों पर जुर्माना लगाया गया था, वह राशि वापस की जाए। एमआईएस के तहत देय भुगतान तुरंत जारी किया जाए। स्प्रे ऑयल, खाद, उर्वरक और अन्य आवश्यक उपकरण शीघ्र उपलब्ध कराए जाएं। भाजपा ने दो टूक कहा कि कांग्रेस सरकार की लापरवाही, अव्यवस्था और किसान विरोधी रवैये के कारण हिमाचल की बागवानी और सेब अर्थव्यवस्था को गहरी चोट पहुंची है। पार्टी ने चेतावनी दी कि अगर मांगें शीघ्र पूरी नहीं की गईं, तो इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक पूरी मजबूती के साथ उठाया जाएगा।
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