शून्य लागत प्राकृतिक खेती प्रोजेक्ट के कार्यकारी निदेशक डॉ. राजेश्वर चंदेल ने बताया कि पहले चरण में 80 पौधों को लिया गया है। इन पौधों को प्राकृतिक पद्घति से जीवित कर फिर से फलदार बनाया जाएगा। इनमें कुछ पौधे केमिकल की वजह से तो कुछ को बंदरों की वजह से नुकसान पहुंचा था। इसलिए खेती शुरू करने से पहले सोलर फेंसिंग से पूरे एरिया को कवर किया जाएगा और उसके बाद खेती शुरू होगी।
हिमाचल ने की है प्राकृतिक खेती की शुरूआत
प्राकृतिक खेती को सरकारी तौर पर अपनाने वाला हिमाचल पहला राज्य है। हिमाचल में सरकार ने इस पद्घति को बढ़ावा देने के लिए बजट में भी 25 करोड़ का प्रावधान किया था। इसके सकारात्मक परिणाम के बाद केंद्र की मोदी सरकार ने इस साल के बजट में इसे शामिल किया है।