हिमाचल के कर्मचारी संगठन राज्य में अनुबंध सेवाओं को पूरी तरह से खत्म करवाना चाहते हैं। इसके लिए एक कर्मचारी संगठन ने समान सेवाओं पर समान वेतन देने के वर्ष 2016 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आधार बनाया है। इसी संगठन ने इस फैसले को लागू करवाने के लिए प्रशासनिक ट्रिब्यूनल याचिका भी दायर कर दी है।
हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष वीरेंद्र चौहान का कहना है कि सीएम वीरभद्र सिंह ने अनुबंध कर्मचारियों को नियमित करने की अवधि को नियुक्ति के पांच साल से घटाकर तीन साल कर दिया है, ये सही फैसला है। लेकिन संघ इस अवधि को घटाकर शून्य वर्ष करने की बात कर रहा है।
वीरेंद्र चौहान ने कहा कि वर्ष 2016 में सर्वोच्च न्यायालय ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण आदेश पारित किया था, जिसमें कहा था कि कर्मचारियों को उनकी समान सेवाओं के लिए समान वेतन दिया जाना चाहिए।
इसका मतलब यह हुआ कि किसी भी विभाग में कोई भी अनुबंध आधार पर नियुक्तियां करना गलत हैं। हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ इस आदेश के आने के बाद कई बार ये मामला सीएम वीरभद्र सिंह के समक्ष उठा चुका है। अब प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में भी याचिका दायर की गई है।