विश्व में प्रबंधन गुरू के नाम से जाने वाले पद्मश्री से सम्मानित प्रोफेसर शोजी शिबा का मानना है कि औद्योगिक विकास, कारपोरेट सेक्टर और अन्य क्षेत्रों में भारत को अपनी प्रबंधन प्रक्रिया तैयार करने की जरूरत है। वर्तमान में अधिकतर अमेरिका और जापान की प्रबंधन तकनीकें भारत में उपयोग में लाई जा रही हैं।
युवाओं की जनसंख्या हर रोज बढ़ रही है। लेकिन, उद्योग के लिए जरूरी कौशल और तकनीक की कमी होने के कारण उन्हें नौकरी मिलना मुश्किल हो रहा है। शिक्षा और उद्योग के बीच यहां एक बड़ा अंतर है। वह शूलिनी विश्वविद्यालय में विजनरी लर्निंग कम्यूनिटी ऑफ इंडिया (वीएलसीआई) कार्यक्रम के शुभारंभ पर अपने विचार साझा कर रहे थे। एक साल का यह प्रबंधन-प्रशिक्षण कार्यक्रम छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए है।
कार्यक्रम पूरा होने पर शूलिनी के छात्रों की उद्योग में नौकरी पाने की क्षमता बनाने के लिए प्रशिक्षण सामग्री तैयार की जाएगी और इसी तरह का एक प्रोग्राम शुरू किया जाएगा। जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) और कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) के सहयोग से इसे लागू किया जा रहा है। आठ उद्योगों के 30 प्रबंधक और शूलिनी के चार संकायों के सदस्य वीएलसीआई कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं। शूलिनी विश्वविद्यालय के प्रो-वाइस चांसलर प्रो अतुल खोसला ने कहा कि सब इस पहल से बहुत खुश हैं।
अब्दुल कलाम के कायल हैं प्रो शोजी
प्रो शोजी शिबा पिछले 13 सालों से प्रबंधन के क्षेत्र में भारत में काम कर रहे हैं। भारत में काम करने के पीछे वह भारत के पूर्व राष्ट्रपति दिवंगत डा. अब्दुल कलाम के साथ उनकी एक मुलाकात को श्रेय देते हैं।
पहली बार उत्तर भारत में कार्यक्रम हुआ लागू: नागपाल
सीआईआई की प्रमुख सलाहकार डॉ सरिता नागपाल ने कहा कि यह पहली बार है जब उत्तरी भारत में ऐसा कार्यक्रम लागू किया गया है। इस कार्यक्रम के लिए उद्योग और शिक्षा क्षेत्र एक साथ हुए हैं। एक साल के कार्यक्रम के दौरान परवाणू उद्योग में इनपुट दिए जाएंगे और शूलिनी विश्वविद्यालय के संकाय भी कार्यक्रम में शामिल होंगे। कार्यक्रम पूरा होने पर वे शूलिनी के छात्रों की उद्योग में नौकरी पाने की क्षमता बनाने के लिए प्रशिक्षण सामग्री तैयार करेंगे और इसी तरह का एक प्रोग्राम शुरू करेंगे।
यह ले रहे हिस्सा
इस प्रोग्राम के मुख्य गुरु चंद्रकांत पटेल और सईदीप रत्नम हैं, जो स्वैच्छिक आधार पर वीएलसीआई का हिस्सा बने हैं। जापानी पक्ष से ऑपरेटिंग एजेंसी जेआईसीए की ओर से प्रायोजित जापानी विशेषज्ञों में प्रोफेसर शोजी शीबा और फुरहशी हैं। भारतीय सरकार का औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग इस कार्यक्रम की नोडल एजेंसी है, जबकि मानव संसाधन विकास मंत्रालय का भी इस प्रोग्राम को पूरा सहयोग है। सीआईआई, आईआईटी कानपुर और मद्रास तथा आईआईएम कोलकाता इसके फाउंडिंग पार्टनर हैं।