अनुराग ने कहा कि हाल ही में कांग्रेस शासित राज्य तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी अपने प्रदेश की इसी तरह की समस्या को लेकर दिल्ली आए। प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री ने उनकी मदद की, जिसका जिक्र रेड्डी ने तेलंगाना की विधानसभा में किया। अनुराग ने कहा कि हम कोऑपरेटिव फेडरलिज्म में भरोसा रखते हैं और यदि तेलंगाना कर सकता है तो हिमाचल क्यों नहीं। अनुराग ने कहा कि 2014 से अब तक केंद्र सरकार ने हिमाचल की दिल खोल कर मदद की। नए वित्त आयोग के फॉर्मूले के तहत हिमाचल का शुद्ध संघीय करों में हिस्सा 0.830 फीसदी (15वें वित्तायोग के आधार पर) से बढ़कर 16वें वित्तायोग के तहत 0.914 फीसदी हो गया है, जो एक संरचनात्मक वृद्धि को दिखाता है।
पहाड़ी राज्यों के लिए पूंजीगत सहायता के प्रति केंद्र का रवैया भी बदला है। वित्त आयोग से जुड़े स्थानीय निकायों के अनुदान भी हिमाचल के लिए काफी बढ़े हैं। इसमें ग्रामीण स्थानीय निकायों को अकेले 16वें वित्तायोग के तहत 3744 करोड़ रुपये मिले हैं, जो 15वें वित्तायोग के 1673 करोड़ रुपये से लगभग दोगुना है। उन्होंने कहा कि 2026-27 में हिमाचल की वार्षिक हस्तांतरण प्राप्तियां 2025-26 के 11,561.66 करोड़ से बढ़कर 13,947 करोड़ रुपये हो गई हैं। 2300 करोड़ से अधिक की वृद्धि हुई है। हिमाचल का डेवोल्यूशन घटा नहीं, बल्कि बढ़ा है। उन्होंने कहा कि 14 वें वित्त आयोग और 15वें वित्त आयोग के तहत बड़े आरडीजी हस्तांतरणों के बावजूद वास्तविक राजस्व घाटा सामान्य की ओर नहीं बढ़ा। कई राज्यों ने राजस्व संग्रहण को मजबूत नहीं किया या व्यय को युक्तिसंगत नहीं बनाया। ऐसे में 16वें वित्त आयोग ने सामान्य आरडीजी को जारी रखना प्रतिकूल माना।