लाहौल-स्पीति की विधायक अनुराधा राणा स्वाइन फ्लू की चपेट में आ गई हैं। वायरल संबंधी शिकायत के चलते वह पिछले कुछ दिनों से आईजीएमसी शिमला में उपचाराधीन थीं। बुधवार को चिकित्सकों ने उनका स्वाइन फ्लू टेस्ट करवाया, जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई।
रिपोर्ट आने के बाद चिकित्सकों ने विधायक को अस्पताल से छुट्टी दे दी। उन्हें अगले 10 दिनों तक होम आइसोलेशन में रहने की सलाह दी गई है। इस दौरान उन्हें लोगों से दूरी बनाए रखने और संक्रमण फैलने से रोकने के लिए सावधानी बरतने को कहा गया है। विधायक अनुराधा राणा ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने स्वाइन फ्लू संक्रमित होने की जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि आइसोलेशन की अवधि में वह किसी से मुलाकात नहीं कर पाएंगी।
गौरतलब है कि बीते दिनों मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भी आईजीएमसी शिमला पहुंचकर विधायक अनुराधा राणा से मुलाकात की थी। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार हिमाचल प्रदेश में स्वाइन फ्लू के मामलों की संख्या बढ़कर 12 हो गई है। संक्रमण के चलते प्रदेश में अब तक दो मरीजों की मौत भी हो चुकी है।
क्या है स्वाइन फ्लू और इससे कैसे करें बचाव?
स्वाइन फ्लू आमतौर पर इन्फ्लुएंजा-ए वायरस से होने वाला श्वसन संक्रमण है। आम बोलचाल में एच1एन1 संक्रमण को भी स्वाइन फ्लू कहा जाता है। हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार एच1एन1 वायरस अब मौसमी इन्फ्लुएंजा का हिस्सा बन चुका है और इसका संक्रमण इंसान से इंसान में फैल सकता है।
कैसे फैलता है संक्रमण?
संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने के दौरान निकलने वाली संक्रमित बूंदों और छोटे कणों के संपर्क में आने से फ्लू फैल सकता है। संक्रमित हाथों के जरिए आंख, नाक या मुंह को छूने पर भी संक्रमण का खतरा रहता है। बंद और भीड़भाड़ वाली जगहों पर संक्रमण फैलने की संभावना अधिक हो सकती है।
स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण
स्वाइन फ्लू या इन्फ्लुएंजा में अचानक बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी तथा नाक बहने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कई लोगों में बीमारी लगभग एक सप्ताह में ठीक हो जाती है, लेकिन बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और कुछ पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों में गंभीर संक्रमण का खतरा अधिक रहता है।
इन तरीकों से करें बचाव
1. फ्लू वैक्सीन लगवाएं:
मौसमी इन्फ्लुएंजा से बचाव के लिए हर साल फ्लू वैक्सीन सबसे प्रभावी उपायों में से एक है। खासकर अधिक जोखिम वाले लोगों को टीकाकरण के संबंध में डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
2. हाथों की सफाई रखें:
साबुन और पानी से नियमित रूप से हाथ धोएं। उपलब्ध न होने पर अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल किया जा सकता है।
3. खांसते-छींकते समय मुंह ढकें:
खांसी या छींक आने पर टिश्यू या कोहनी से मुंह और नाक ढकें। इस्तेमाल किए गए टिश्यू को तुरंत कूड़ेदान में डालें।
4. बीमार व्यक्ति से दूरी रखें:
फ्लू के लक्षण होने पर भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें और दूसरों के संपर्क को कम करें। जरूरत पड़ने पर मास्क का इस्तेमाल संक्रमण फैलने के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
5. कमरे में हवा का प्रवाह बनाए रखें:
बंद कमरे में लंबे समय तक रहने के बजाय खिड़कियां खोलकर ताजी हवा का आवागमन बनाए रखना संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
6. लक्षण दिखने पर लापरवाही न करें:
तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, लगातार खांसी या हालत बिगड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें। अधिक जोखिम वाले मरीजों में डॉक्टर की सलाह पर एंटीवायरल दवाएं शुरुआती चरण में ज्यादा प्रभावी हो सकती हैं। एंटीबायोटिक दवाएं वायरस के खिलाफ काम नहीं करतीं।