पांच सितंबर को होगा चुनाव, उपनगरों के कारोबारी नहीं ले पाएंगे हिस्सा
कल जारी किया जाएगा चुनाव का पूरा शेड्यूल
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। व्यापार मंडल शिमला के चुनाव टलने से नाराज कारोबारियों के धड़े ने सितंबर में चुनाव करवाने का एलान कर दिया है। पांच सितंबर को चुनाव करवाने का फैसला लिया है।
चुनाव करवाने के लिए कारोबारी नेता अरुण कुठियाला को चुनाव आयुक्त बनाया है। मंगलवार को नाराज कारोबारियों के गुट ने बैठक कर चुनाव का एलान किया। कारोबारी नेता अश्वनी मिनोचा और कंवलजीत सिंह ने कहा कि कारोबारियों में फूट न पड़े, इसीलिए वह 25 जुलाई को हुए जनरल हाउस में गए। लेकिन व्यापार मंडल के पदाधिकारी वार्षिक रिपोर्ट या लेखा जोखा रखने की बजाय जनरल हाउस में खुद को एक्सटेंशन दे गए। कहा कि नौ साल के कार्यकाल के बाद भी व्यापार मंडल के पदाधिकारी खुद को एक साल और दे रहे हैं। जनरल हाउस में कोरम पूरा नहीं था। इस जनरल हाउस से भी जब कई कारोबारी बाहर आ गए तो इसके बाद एक्सटेंशन का फैसला ले लिया। इसे नहीं मानेंगे। कहा कि चुनाव आयुक्त खुद चुनाव कमेटी बनाएंगे जो चुनाव का शेड्यूल तैयार करेगी। दावा किया कि चुनाव हर हाल में होंगे और कारोबारी उनके साथ है। इस बैठक में कारोबारी नेता अरुण कुठियाला, कपिल महाशय, रमेश अग्रवाल, दीपक श्रीधर, कमल बुटेल, अजय सरना, रजनीश, करनैल सिंह, मदन शर्मा मौजूद रहे।
शिमला व्यापार मंडल से नाराज कारोबारियों का धड़ा वीरवार को पूरा चुनाव शेड्यूल जारी करेगा। फैसला लिया है कि चुनाव में सिर्फ शिमला विधानसभा क्षेत्र के वार्डों और बाजारों के ही कारोबारी शामिल होंगे। शिमला ग्रामीण में शामिल शोघी, कच्चीघाटी, टुटू, घणाहट्टी चुनाव में शामिल नहीं होंगे। इसी तरह कसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र के तहत कसुम्पटी बाजार, पंथाघाटी, मैहली, ढली, मशोबरा के कारोबारी भी इसमें हिस्सा नहीं ले पाएंगे।
कारोबारियों को किया जा रहा गुमराह : इंद्रजीत
शिमला व्यापार मंडल अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह ने कहा कि चंद कारोबारी नेता शहर के कारोबारियों को गुमराह कर रहे हैं। व्यापार मंडल को दोफाड़ करने की साजिश रच रहे हैं। कारोबारी गुमराह न हों और व्यापार मंडल में भरोसा कायम रखें। कहा कि हाउस सर्वोपरि है। इसमें सबने कोरोना को देखते हुए एक्सटेंशन का फैसला लिया था। कहा कि यह आरोप लगाना कि हाउस में चुनिंदा लोग ही बुलाए गए, ये गलत है। यह आरोप लगाने वाले कारोबारी भी हाउस में मौजूद थे। 90 से ज्यादा लोग जनरल हाउस का हिस्सा था जिसने एक्सटेंशन का फैसला लिया। ये अब हाउस का फैसला नहीं मान रहे।