हिमाचल की प्रसिद्ध मणिमहेश झील में वैज्ञानिकों ने दुर्लभ एंटी फ्रीज प्रोटीन वैक्टीरिया की खोज की है। ये वैक्टीरिया माइनस 20 डिग्री तापमान पनपता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि इतने ठंडे पानी में भी शरीर को जमने नहीं देता और उसे लड़ने की ताकत देता है।
इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि ये वैक्टीरिया आर्कटिक और एंटार्टिक में पाई जाने वाली व्हेल मछली में पाया जाता है। यही कारण है कि व्हेल बर्फ से जमे समुद्रों में भी जिंदा रहती है। वैक्टीरिया उसके शरीर को गर्मी देता है जो उसे माइनस 50 डिग्री में भी बचाए रखता है। अगली स्लाइड में जानिए क्या है इसका फायदा..
दावा: भारत में इस तरह की ये पहली खोज
समुद्र तल से 13390 फीट की ऊंचाई पर स्थित मणिमहेश झील के पानी में शोध शूलिनी विवि के वैज्ञानिकों ने किया है। उनका दावा है कि झील के पानी के सैंपल पर महीनों की शोध के बाद सफलता मिली है।
यह वैक्टीरिया माइक्रोब है इसलिए इसे माइक्रोस्कोप के बिना नहीं देखा जा सकता है। वैज्ञानिकों ने इसे एमएमपीएच-4 वैक्टीरिया नाम दिया है। उन्होंने बताया कि ये वैक्टीरिया मणिमहेश झील में बहुतायत है। दावा किया जा रहा है कि भारत में इस तरह की ये पहली खोज है।
वैक्टीरिया के ये हैं फायदे
एमएमपीएच-4 वैक्टीरिया शारीरिक और पेड़-पौधों की संरचना में महत्वपूर्ण उपलब्धि हो सकता है। इस वैक्टीरिया से एंटी फ्रीज का शोधन करने के बाद वैज्ञानिक इससे फलों, सब्जियों और खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने वाले प्रिजरवेटिव बनाने की तैयारी में हैं। एंटी फ्रीज प्रोटीन ठंडे मरुस्थलीय क्षेत्रों में फसलें उगाने में सहायक सिद्ध होगा। दावा है कि इससे बनने वाली खाद कारगर सिद्ध होगी। उद्योग जगत में ये वैक्टीरिया किसी क्रांति से कम नहीं होगा।
लकवा दूर करने में सक्षम- विदेशों में चिकित्सा जगत में इस एंटी फ्रीज प्रोटीन का प्रयोग हो रहा है। अगर किसी इंसान को या फिर उसके किसी अंग को लकवा मार जाए तो इसके प्रयोग से यह जम चुके अंग या शरीर के हिस्से के लिए कारगर इलाज सिद्ध होता है।
एक मत ये भी
एंटी फ्रीज प्रोटीन के मानव पर प्रभावों के बारे में विशेषज्ञों के अलग-अलग मत हैं। पैक्ड खाने के माध्यम से हर रोज ये प्रोटीन बहुत थोड़ी मात्रा में लोगों के शरीर में जाता है। कहा जाता है कि यह एंटी फ्रीज प्रोटीन पुरुष की प्रजनन क्षमता पर प्रभाव डालता है। जबकि कुछ चिकित्सकों ने इसे सर्जरी इत्यादि के समय प्रयोग लायक बताया है।
शूलिनी विवि के एसोसिएट प्रोफेसर कम एसोसिएट डीन स्कूल ऑफ बायो टेक्नालॉजी डॉ. कमल देव ने बताया कि मणिमहेश झील में वैक्टीरिया मिला है। इस पर कई तरह के शोध चल रहे हैं। इस वैक्टीरिया का इस्तेमाल और किस तरह से हो सकता है, इस पर परीक्षण चल रहे हैं।