प्रदेश के सरकारी स्कूलों के मास्टर ‘बंक’ मारने में बच्चों से आगे निकल गए हैं। एनुअल स्टेटस ऑफ एजूकेशन रिपोर्ट -2014 के ग्रामीण स्कूलों में हुए सर्वे में यह खुलासा हुआ है।
इतना ही नहीं इस रिपोर्ट में बच्चों की उपस्थिति (सर्वे के दिन) जहां 86.3 मिली तो बच्चों के मुकाबले 76.7 प्रतिशत शिक्षक ही स्कूलों में उपस्थिति मिले, जो पिछले वर्ष 85.4 फीसदी था। 2013 में बच्चों की उपस्थिति 86.2 थी, जो इस बार 86.3 पाई गई।
बच्चों की उपस्थिति में एक अंक का इजाफा हुआ तो मास्टरों की अनुपस्थिति 8 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है। स्थिति साफ है कि गांव के स्कूलों में या तो मास्टर बच्चों को पढ़ाने में गंभीर नहीं है या फिर उन पर किसी तरह की कोई जिम्मेवारी तय नहीं की है।