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हमीरपुर: अनिल ने देहदान का प्रण लेकर बफीर्ले दर्रों को किया पार, 17 दिन में तय किया 430 किमी का सफर

Fri, 03 Jul 2026 06:39 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर।

सार

 देहदान का संकल्प लेकर समाज में अंगदान और देहदान के प्रति जागरूकता फैलाने निकले हमीरपुर के भोरंज निवासी ट्रैकर अनिल कुमार ने 17 दिनों में मनाली से लेह तक 430 किलोमीटर की दुर्गम पदयात्रा पूरी कर कुछ ऐसी ही मिसाल कायम की है।
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अनिल कुमार। - फोटो : अमर उजाला
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हौसले बुलंद हों, तो मंजिलें भी मिल ही जाती हैं। देहदान का संकल्प लेकर समाज में अंगदान और देहदान के प्रति जागरूकता फैलाने निकले हमीरपुर के भोरंज निवासी ट्रैकर अनिल कुमार ने 17 दिनों में मनाली से लेह तक 430 किलोमीटर की दुर्गम पदयात्रा पूरी कर कुछ ऐसी ही मिसाल कायम की है। इस दौरान उन्होंने बर्फ से ढके बारालाचा ला, नकीला, लाचुलुंग ला और तांगलांग ला जैसे चार ऊंचे दर्रों को पार किया। कठिन मौसम, ऑक्सीजन की कमी और दुर्गम रास्तों के बावजूद उनका कदम कहीं नहीं डगमगाया। इस अभियान की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि यात्रा से प्रभावित होकर दो लोगों ने अंगदान का संकल्प लिया जबकि चार अन्य लोगों ने अनिल से संपर्क कर अंगदान और देहदान की प्रक्रिया शुरू करने की इच्छा जताई। अनिल की यह यात्रा छह परिवारों तक जीवन बचाने का संदेश पहुंचाने में सफल रही।

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पेशे से ट्रैकर अनिल कुमार ने बताया कि रास्ते में जहां-जहां लोग मिले, उन्होंने अभियान को सराहा और भरपूर सहयोग दिया। उन्होंने कहा कि सफर आसान नहीं था, लेकिन हर कठिन चढ़ाई उन्हें अपने उद्देश्य के और करीब ले जाती रही। अनिल का कहना है कि अंगदान केवल दान नहीं, बल्कि किसी की सांसों को लौटाने का संकल्प है। एक व्यक्ति के अंगदान से कई गंभीर मरीजों को नया जीवन मिल सकता है। वर्तमान में देश और दुनिया में लाखों मरीज अंग प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अंगों की कमी के कारण उन्हें समय पर जीवनरक्षक उपचार नहीं मिल पाता। उन्होंने लोगों से अपील की कि अंगदान और देहदान को लेकर फैली भ्रांतियों से बाहर निकलें और मानवता की इस सबसे बड़ी सेवा में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। उनका कहना है कि धर्म, जाति और समुदाय से ऊपर उठकर किया गया अंगदान ही सच्चे अर्थों में महादान है, जो मृत्यु के बाद भी किसी के जीवन में नई सुबह ला सकता है।

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