सरकारी स्कूलों की प्री प्राइमरी कक्षाओं में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की तैनाती न करने और अन्य मांगों को लेकर आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर यूनियन (सीटू संबंधित) ने मंगलवार को विधानसभा के बाहर प्रदर्शन किया। हजारों आंगनबाड़ी कर्मी पंचायत भवन शिमला पर जुटे। यहां से रैली निकालते हुए विस पहुंचे। दोपहर 12 बजे कर्मियों ने मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। रैली के दौरान शहर में करीब डेढ़ घंटे जाम लगा। यूनियन की राष्ट्रीय अध्यक्ष ऊषा रानी के नेतृत्व में बारह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मिला और उन्हें नौ सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी कर्मियों की मांगों को पूर्ण करने का आश्वासन दिया।
प्रदेश के साढ़े अठारह हजार आंगनबाड़ी केंद्रों के सैंतीस हजार आंगनबाड़ी कर्मी हड़ताल पर रहे। इस दौरान आंगनबाड़ी केंद्र बंद रहे। यूनियन की राष्ट्रीय अध्यक्ष ऊषा रानी, प्रदेशाध्यक्ष नीलम जसवाल और महासचिव वीना शर्मा ने कहा कि छ: वर्ष से कम उम्र के बच्चों की शिक्षा का कार्य पिछले पैंतालीस वर्षों से आंगनबाड़ी कर्मी ही कर रहे हैं। लेकिन अब इन बच्चों को बढ़ाने का जिम्मा एनटीटी का प्रशिक्षण प्राप्त या फिर आउट सोर्स किया जा रहा है। इससे स्थिति स्पष्ट है कि छोटे बच्चों को अब सरकारी स्कूल में भेजा जाएगा और आंगनबाड़ी केंद्र बंद हो जाएंगे।
उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार को चेताया है कि अगर आंगनबाड़ी वर्कर को प्री प्राइमरी कक्षाओं के लिए नियुक्त करने के आदेश जारी न किए तो आंदोलन तेज होगा। सीटू राष्ट्रीय सचिव कश्मीर ठाकुर, प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, महासचिव प्रेम गौतम, उपाध्यक्ष जगत राम, खीमी भंडारी, सुदेश ठाकुर, आशा देवी, लज्या देवी, हरदेई, मीनाक्षी, राजकुमारी, बिम्बो देवी, मीना देवी, वीना देवी, बिमला देवी, पिंगला गुप्ता, सरोज, रितेश, निर्मला ने रैली को संबोधित किया।
यह हैं यूनियन की मांगे
आंगनबाड़ी कर्मियों को हरियाणा की तर्ज पर 11,800 वेतन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराना।
आंगनबाड़ी कर्मियों के लिए तीन हजार रुपये पेंशन, दो लाख रुपये ग्रेच्युटी, मेडिकल और छुट्टियां।
कर्मियों की रिटायरमेंट उम्र 65 वर्ष किया जाना।
नई शिक्षा नीति 2020 को खत्म करना।
मिनी आंगनबाड़ी कर्मियों को बराबर वेतन देना।
आंगनबाड़ी कर्मियों को वर्ष 2013 का एनएचएम में किए गए कार्य की बकाया राशि का भुगतान।