राज्य आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर यूनियन संबंधित सीटू सात जून को सचिवालय का 24 घंटे के लिए घेराव करेगी। इस महापड़ाव के चलते सात जून को प्रदेश में स्थित 18845 आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद रखने का दावा किया गया है। सोमवार को सीटू कार्यालय शिमला में यूनियन की बैठक में फैसला लिया गया कि इस दौरान मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
बीते चार साल से वेतनवृद्धि नहीं होने पर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा। यूनियन की राज्य अध्यक्ष खीमी भंडारी और महासचिव राजकुमारी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं को सम्मानजनक वेतन देने का वायदा किया था। चार साल पूरे होने पर मोदी सरकार ने आंगनबाड़ी महिलाओं के वेतन में एक रुपये की वृद्धि नहीं की।
मोदी सरकार आंगनबाड़ी योजना को कमजोर करने व बंद करने के लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने मांग की कि प्रदेश में हरियाणा की तर्ज पर वर्कर्स को 11500 रुपये, हेल्पर को 6000 रुपये मासिक वेतन दिया जाए। सेवानिवृत्ति पर 2000 रुपये पेंशन और दो लाख रुपये ग्रेच्युटी दी जाए। आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष की जाए।
मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों को पूर्ण आंगनबाड़ी केंद्र बनाया जाए। 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू किया जाए। आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर को स्थायी किया जाए।
केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषाहार के पैसे को बच्चे की माता के खाते में डालने संबंधी याचिका को वापस लिया जाए। बैठक में सुमित्रा, वीना, नीलम, राजकुमारी, विमला, सुदेश, हिमी, गोदावरी सहित कई अन्य महिलाएं मौजूद रहीं।