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विधवाओं को जमीन देने के लिए पैतृक संपत्ति नहीं बनेगी बाधा

Wed, 05 Dec 2018 12:35 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल प्रदेश में विधवाओं को भूमिहीन कोटे की जमीन का लाभ लेना हो तो इसके आड़े उसके नाम की पैतृक संपत्ति नहीं आएगी। बशर्ते अन्य तमाम स्रोतों से उसकी सालाना आय 50 हजार रुपये से कम होनी चाहिए।

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ऐसी विधवाओं को मकान बनाने को सरकार शहरी क्षेत्रों में दो और ग्रामीण क्षेत्रों में तीन-तीन बिस्वा जमीन देगी। यह लाभ उन विधवाओं को ही मिलेगा, जिनके पति भूमिहीन थे। अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) राजस्व मनीषा नंदा ने इसकी पुष्टि की है। 

राज्य सरकार के ध्यान में मामला लाया गया था कि पैतृक संपत्ति में हिस्सेदार 50 हजार रुपये से कम पारिवारिक आय वाली विधवाओं को जमीन आवंटन का लाभ नहीं दिया जा रहा है। अब यह साफ हो गया है कि ऐसी विधवाएं भी जमीन पाने की हकदार होंगी, जिनके नाम पर पैतृक संपत्ति है या जिनका मायके में अपना हिस्सा है।

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प्रदेश में मायके की संपत्ति पर हिस्सा होने के बावजूद यहां की अधिकांश महिलाएं इस पर कब्जा नहीं लेती हैं, जबकि कानूनन उनका अधिकार होता है। ऐसे तमाम पहलुओं पर ही सरकार ने गौर किया है। उन्होंने प्रदेश के समस्त मंडलायुक्तों, उपायुक्तों, बंदोबस्त अधिकारियों, एसडीएम, तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को इस संबंध में दिशा-निर्देशों की अनुपालना करने को कहा है।

अभी भूमिहीन को मिलती थी जमीन
प्रदेश सरकार अभी भूमिहीन लोगों को घर बनाने के लिए जमीनें देती रही है। इन्हीं में अगर विधवाएं भी आती हाें तो उन्हें भी यह लाभ मिलता था, मगर उनके आय प्रमाणपत्र में पैतृक संपत्ति बाधा बनती थी। सरकार के नए फैसले से हिमाचल की हजारों महिलाएं लाभान्वित होंगी। इसमें देखना यह होगा कि ऐसी विधवा को अपने पति के घर में ही रहना होगा। बेशक मायके में उसके नाम से प्रापर्टी हो।
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