इन्हीं में हिमाचल की कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल भी हैं। आशा कुमारी को भी वीरभद्र के विरोधी नेताओं में गिना जाता रहा है। हालांकि, यह अलग बात है कि उन्होंने अनेक बार वीरभद्र से अपने सियासी संबंध सामान्य बनाने के भी खासे प्रयास किए।
इसके बावजूद वीरभद्र सरकार में खुद पर चलाए गए एक मामले से वह आहत भी बताई जा रही हैं। ऐसे में उनको तवज्जो देने से भी वीरभद्र समर्थक परेशानी में हैं।
सीडब्ल्यूसी संगठन की नियुक्तियों से लेकर लोकसभा और विधानसभा चुनाव के टिकटों को तय करने में भी अहम भूमिका निभाती है। ऐसी स्थिति में लोकसभा चुनाव से पहले यह दोनों ही नियुक्तियां वीरभद्र समर्थकों के लिए झटके की तरह हैं।