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Shimla News: आईजीएमसी से एनेस्थीसिया व रेडियोलॉजी विभाग होंगे शिफ्ट

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चमियाना स्थानांतरण का सेमडीकोट ने जताया विरोध, फैसले को बताया गलत आंदोलन की धमकी
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विभागों के साथ चिकित्सकों के स्थानांतरण से होगी दिक्कत

अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) से एनेस्थीसिया और रेडियोलॉजी समेत अन्य विभागों और फैकल्टी को अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशलिटी चमियाना में शिफ्ट किया जाएगा।

इसके अलावा कई और विभागों की फैकल्टी को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना में स्थानांतरित करने के आदेश भी जारी किए हैं। ऐसे में आईजीएमसी में चिकित्सकों की कमी और बढ़ने की आशंका है। विभागों और फैकल्टी को शिफ्ट करने के फैसले का स्टेट एसोसिएशन ऑफ मेडिकल एंड डेंटल कॉलेज टीचर्स (सेमडीकोट) ने विरोध जताया है। एसोसिएशन ने कहा कि विभागों और फैकल्टी को शिफ्ट करना गलत है। इससे चिकित्सकों की कमी दूर नहीं होगी बल्कि आईजीएमसी में पद खाली हो जाएंगे।
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संघ ने स्पष्ट किया कि वह सुपर स्पेशलिटी सेवाओं के विकास के खिलाफ नहीं है, लेकिन मूल संस्थान को कमजोर करके नया ढांचा खड़ा करना तर्कसंगत नहीं है। एसोसिएशन ने सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। सेमडीकोट ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो चिकित्सक आंदोलन करेंगे। संघ के अनुसार बिना उचित योजना के फैकल्टी के तबादले करना नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के न्यूनतम संकाय मानकों का उल्लंघन हो सकता है। इससे एमबीबीएस और एमडी-एमएस की सीटों की मान्यता पर संकट पैदा हो सकता है। दोनों अस्पतालों के बीच स्पष्ट रेफरल व्यवस्था नहीं होने से मरीजों और बुजुर्गों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। एनपीए को लेकर चिकित्सकों के बीच कथित भेदभाव, छुट्टियों में कटौती और अनिश्चित तबादला नीति के कारण भी फैकल्टी में असंतोष है।
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तबादलों पर तुरंत रोक लगाने का आग्रह
आईजीएमसी में वीरवार को हुई सेमडीकोट की बैठक में सरकार से फैकल्टी और विभागों के स्थानांतरण संबंधी आदेशों पर तुरंत रोक लगाने का आग्रह किया है। साथ ही सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में संकाय, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की अलग से नई भर्तियां करने की मांग की है। एसोसिएशन ने सुझाव दिया है कि चमियाना अस्पताल को आईजीएमसी का सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक मानते हुए इसका एकीकृत नियंत्रण आईजीएमसी प्रशासन के पास ही रखा जाए। इसके अलावा, स्वास्थ्य विभाग, अस्पताल प्रशासन और फैकल्टी प्रतिनिधियों को शामिल कर एक समीक्षा समिति गठित करने की मांग की है। सेमडीकोट के अध्यक्ष डॉ. बलबीर एस. वर्मा और महासचिव डॉ. पीयूष कपिला ने कहा कि वे टकराव के बजाय सहयोगात्मक समाधान चाहते हैं। उन्होंने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की, ताकि प्रदेश के सबसे पुराने और प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान की गरिमा और मरीजों की देखभाल प्रभावित न हो।
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