अस्पताल प्रबंधनों ने सरकारी एंबुलेंस भी करवाई मुहैया
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प्रसूताओं को छुट्टी के बाद एंबुलेंस में भेजा घर अमर उजाला ब्यूरो शिमला। सीटू से संबंधित 102 और 108 एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल का राजधानी के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज, कमला नेहरू समेत डीडीयू अस्पताल में मिलाजुला असर देखने को मिला। जिले के अस्पतालों से रेफर होने वाले कई मरीज निजी वाहनों और संस्थाओं की एंबुलेंस में उपचार के लिए अस्पतालों में पहुंचे।
कई मरीज 108 एंबुलेंस की सहायता से भी अस्पतालों में आपातकालीन स्थिति में उपचार के लिए आए। केएनएच से प्रसूता महिलाओं को छुट्टी के बाद अस्पताल की एंबुलेंस के जरिये घरों को भेजा गया। इसके साथ केएनएच से आईजीएमसी में मेडिसिन कंसल्टेंट के लिए भी गर्भवती महिलाओं को अस्पताल की एंबुलेंस सहारा बनी। सोमवार को सुबह 11:00 बजे केएनएच अस्पताल में गर्भवती महिला को संस्था की एंबुलेंस की सहायता अस्पताल प्रशासन की ओर से घर भेजा गया।
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केएनएच की 108 एंबुलेंस खड़ी रहीं। दाड़लाघाट अस्पताल से आईजीएमसी शिमला रेफर किए मरीज को 108 की एंबुलेंस लेकर पहुंची। आपातकालीन स्थिति में महिला को दाड़लाघाट से शिमला रेफर किया था। 108 एवं 102 एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन ने संबंधित सीटू के बैनर तले लंबित पड़ी मांगों को मनवाने के लिए रविवार रात 8:00 बजे से 132 घंटे की हड़ताल शुरू कर दी। यूनियन ने चेताया है कि अगर शीघ्र मांगें पूरी नहीं की गईं तो यूनियन निर्णायक संघर्ष की ओर बढ़ेगी।
सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने कहा कि नेशनल हेल्थ मिशन के तहत कार्यरत मेडस्वान फाउंडेशन के अधीन काम कर रहे सैकड़ों पायलट, कैप्टन और ईएमटी कर्मचारी शोषण के शिकार हैं। इन कर्मचारियों को सरकार की ओर घोषित न्यूनतम वेतन तक नहीं मिलता है। इन कर्मचारियों से बारह घंटे डयूटी करवाई जाती है लेकिन ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जाता है। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय, लेबर कोर्ट, सीजीएम कोर्ट शिमला और श्रम कार्यालय के आदेशों के बावजूद भी इन कर्मचारियों को राहत नहीं मिल पाई है। कमला नेहरू अस्पताल शिमला के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुंदर नेगी ने कहा कि 102 और 108 कर्मचारियों की हड़ताल का मरीजों पर कोई असर नहीं पड़ने दिया है। सभी प्रकार की सुविधाएं मरीजों को मुहैया करवाई है।
मरीजों की सेवा पहला कर्तव्य
दाड़लाघाट से मरीज को 108 एंबुलेंस में लेकर आए राकेश ने कहा कि मरीजों की सेवा करना उनका पहला कर्तव्य है। सोलन के दाड़लाघाट, चंडी, कुनिहार और अर्की में किसी भी प्रकार की हड़ताल नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि 2013 से एंबुलेंस चला रहे हैं और मरीजों की सेवा कर रहे हैं।
फोन किया लेकिन नहीं मिली एंबुलेंस
संजौली के पवन ने बताया कि उन्होंने मरीज को आईजीएमसी ले जाने के लिए 108 पर फोन किया था। इसके बाद एंबुलेंस मुहैया नहीं हो सकी। इसके बाद संस्था की एंबुलेंस के जरिए मरीज को अस्पताल पहुंचाया। एंबुलेंस कर्मचारी हर कभी हड़ताल पर चले जाते हैं इससे काफी दिक्कत मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में आती है।