संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला बुधवार को अपना 57वां स्थापना दिवस मना रहा है। 22 जुलाई 1970 को स्थापित विश्वविद्यालय ने 56 वर्षों में शिक्षा, शोध, न्यायपालिका, राजनीति, प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के क्षेत्र में ऐसी प्रतिभाएं तैयार की हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति महावीर सिंह ने बताया कि अगले एक साल में एचपीयू का फोकस एआई और स्किल कोर्स की ओर रहेगा। विश्वविद्यालय थ्योरी की पढ़ाई से आगे बढ़कर छात्रों को प्रैक्टिकल ज्ञान की ओर प्रेरित करेगा, ताकि छात्र नई रचनाओं और नवाचारों को विकसित कर सकें।
विश्वविद्यालय के सबसे प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों में अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई का नाम प्रमुख हैं। उन्होंने एचपीयू से अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की। तिब्बती आध्यात्मिक गुरु पावन दलाई लामा भी विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों में शामिल हैं। इसके अलावा प्रख्यात अभिनेता अनुपम खेर भी एचपीयू के पूर्व छात्र हैं।
राष्ट्रीय राजनीति में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, मंत्री कर्नल (डॉ.) धनीराम शांडिल, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, पूर्व सांसद राजीव शुक्ला, वीरेंद्र कश्यप, सुरेश चंदेल और कृपाल परमार सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने एचपीयू से शिक्षा हासिल कर सार्वजनिक जीवन में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
न्यायपालिका में भी विश्वविद्यालय की पहचान बेहद मजबूत रही है। भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश संजय करोल, गुजरात हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जुबिली भवानी सिंह और हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश रहे राजीव शर्मा, धरम चंद चौधरी, सुरेश्वर ठाकुर, विवेक सिंह ठाकुर, अजय मोहन गोयल, संदीप शर्मा, चित्र भूषण बरोवालिया और अभिलाषा कुमारी जैसे नाम विश्वविद्यालय की गौरवशाली विरासत का हिस्सा हैं।
पूर्व राज्यपाल और पूर्व आईपीएस अधिकारी डॉ. अश्विनी कुमार, संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (यूएनआईडीओ), वियना में सेवाएं दे चुके डॉ. प्रदीप मोंगा सहित कई आईएएस, आईपीएस, आईएफएस और भारतीय आर्थिक सेवा के अधिकारी देश के महत्वपूर्ण संस्थानों में शीर्ष जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। नीति आयोग, भारत सरकार, नाबार्ड, न्यायिक अकादमी, पुलिस और वन विभाग में भी विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र महत्वपूर्ण पदों तक पहुंचे हैं।
22 जुलाई 1970 को स्थापित हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय प्रदेश में उच्च शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र है। विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर और क्षेत्रीय केंद्रों में 300 से अधिक स्नातक, स्नातकोत्तर, शोध, डिप्लोमा और प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं। इसके साथ 215 सरकारी और निजी महाविद्यालय, बीएड, विधि, नर्सिंग, मेडिकल, डेंटल, आयुर्वेद, होम्योपैथी और अन्य व्यावसायिक संस्थान संबद्ध हैं।