शिमला में बंदरों के आतंक को कम करने की तैयारी शुरू हो गई है। वन विभाग ट्रायल के तौर पर शहर में अल्ट्रा सोनिक साउंड सिस्टम लगाने जा रहा है। इस साउंड सिस्टम से निकलने वाली तरंगों से बंदर भगाने का दावा किया गया है।
हालांकि इस सिस्टम से मनुष्य, पशु और पक्षियों के शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर अभी मंथन चल रहा है। विशेषज्ञों से इस बाबत वन विभाग राय मशवरा कर रहा है। योजना अगर सिरे चढ़ी तो शहर के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
योजना के तहत ट्रायल के तौर माल रोड स्थित सीटीओ बिल्डिंग पर सिस्टम लगाया जाएगा।
पहले लिया जाएगा ट्रायल
ट्रायल अगर सफल रहा तो अन्य स्थानों पर भी इसे लगाया जाएगा। वन विभाग को एक निजी कंपनी ने इस योजना की प्रस्तुति दी है। कंपनी का दावा है कि साउंड सिस्टम 1000 वर्ग फुट के क्षेत्र में अल्ट्रा सोनिक साउंड द्वारा बंदरों को दूर रखा जा सकता है।
उधर, वन विभाग के प्रधान मुख्य अरण्यपाल वन्य जीव ने योजना पर फिलहाल ब्रेक लगा दी है। मेडिकल स्तर पर रिपोर्ट आने के बाद ही इस बाबत आगामी कार्रवाई की जाएगी।
उप महापौर ने बताया के शिमला में बंदरों के आतंक से हर महीने लगभग 200 केस आ रहे हैं। इसके चलते कंपनी द्वारा सुझाए गए साउंड सिस्टम को ट्रायल के तौर पर अपनाना चाहिए। इस योजना से लोगों को भारी राहत मिलने की उम्मीद है।
मानक पूरे करने पर लेंगे फैसला
वन विभाग के मुख्य अरण्यपाल वन्यजीव पीएल चौहान ने बताया है कि इस योजना को ट्रायल के तौर पर शुरू किया जाएगा। विभाग के विशेषज्ञों की देखरेख में पहले इसका परीक्षण होगा। निजी कंपनी को मनुष्य, पशु और पक्षी के स्वास्थ्य पर इस योजना का कुप्रभाव न पड़े। इसका मेडिकल एनओसी लाने को कहा है। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद योजना को शुरू किया जाएगा।
योजना से लोगों को मिलेगी राहत
नगर निगम के उपमहापौर टिकेंद्र पंवर का कहना है कि शिमला शहर में बंदरों ने आतंक मचा रखा है। वन विभाग की इस योजना से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। वन्य जीव कार्यालय को योजना शुरू करने के लिए वन विभाग से अनुमति मिल चुकी है। नगर निगम को भी इसकी कापी भेजी गई है। नगर निगम इस संदर्भ में संचार विभाग को भी लिख चुका है।