प्रोफेसरों की नियुक्तियों, सीएएस पदोन्नतियों से जुड़ा है मामला एक्सक्लूसिव संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला में वर्ष 2014 से 2025 के बीच हुई शिक्षकों की नियुक्तियों और यूजीसी कॅरिअर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत पदोन्नतियों को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। वहीं विवि प्रशासन का कहना है कि इस मामले की शिकायत मिली है जिसकी कमेटी बनाकर जांच की जाएगी।
कुलपति महावीर सिंह को छात्र संघों की तरफ से सौंपे शिकायत पत्र में नियुक्तियों, पदोन्नतियों और अनुभव की गणना में नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं। दस्तावेज के अनुसार कई मामलों में यूजीसी विनियमों, विश्वविद्यालय की वैधानिक संस्थाओं के निर्णयों और निर्धारित भर्ती प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। दस्तावेज में सबसे पहले लाइफ लॉन्ग लर्निंग विभाग में सहायक प्रोफेसर (अर्थशास्त्र) की वर्ष 2014-15 की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि विज्ञापन जारी करने से पहले कार्यकारी परिषद की ओर से सुझाए संशोधित पात्रता मानदंडों को बोर्ड ऑफ स्टडीज, फैकल्टी और अकादमिक परिषद से मंजूरी नहीं मिली थी। इसके बावजूद विज्ञापन में पांच वर्ष का शोध अनुभव अनिवार्य कर दिया गया। इससे पात्र अभ्यर्थियों का दायरा सीमित हुआ और बाद की स्क्रीनिंग और चयन प्रक्रिया प्रभावित हुई। दूसरे मामले में वर्ष 2022 में इंस्टीट्यूट ऑफ वोकेशनल स्टडीज में प्रोफेसर पद पर हुई नियुक्ति को लेकर अनुभव की गणना पर सवाल उठाए हैं। दस्तावेज में कहा गया कि जिस सेवा को विश्वविद्यालय ने अन्य मामलों में शिक्षण अनुभव नहीं माना उसी सेवा को इस नियुक्ति में पात्रता के लिए स्वीकार किया गया।
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शिकायत पत्र में सबसे बड़ा आरोप यूजीसी-सीएएस के तहत हुई पदोन्नतियों को लेकर लगाए हैं। इसमें कहा है कि कुछ शिक्षकों को अनिवार्य सेवा अवधि पूरी किए बिना प्रोफेसर पद तक पदोन्नत किया है। कुछ मामलों में एक साथ कई वेतन स्तरों और पदोन्नतियों का लाभ पूर्व प्रभाव से दिया और एरियर का भुगतान भी किया गया। एक मामले में विश्वविद्यालय छोड़ चुके व्यक्ति को भी प्रोफेसर पद के लिए साक्षात्कार में शामिल किए जाने और गैर-शैक्षणिक अनुभव को सीएएस के लिए मान्य मानने जैसे आरोप लगाए हैं। इसके अलावा गैर-शिक्षण कंप्यूटर प्रोग्रामर के पद को शिक्षण पद के समकक्ष मानने पर भी सवाल उठाए हैं।
दस्तावेज में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की उस टिप्पणी का भी उल्लेख किया गया है जिसमें 2020 से 2023 के दौरान 186 शिक्षकों की नियुक्तियों में शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और अन्य जरूरी अभिलेखों के सत्यापन में खामियों की बात कही गई थी। इस बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने अप्रैल 2026 में सीएएस के तहत पूर्व सेवाओं की गणना के लिए नए निर्देश जारी किए हैं और हाल ही में सीएएस पदोन्नतियों के लिए स्व:मूल्यांकन रिपोर्ट जमा करने संबंधी अधिसूचना भी जारी की है, जिससे नियुक्तियों और पदोन्नतियों का विषय विश्वविद्यालय में लगातार चर्चा का केंद्र बना हुआ है। वहीं वहीं कुलसचिव कुलसचिव ज्ञान सागर नेगी ने बताया कि शिकायत मिली है। इसकी कमेटी बनाकर जांच की जाएगी।