प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चीन दौरे से न केवल दोनों मुल्कों के रिश्तों में सुधार की उम्मीद है बल्कि तिब्बतियों को आजादी की आस भी बंधने लगी है। धार्मिक त्रिवेणी के नाम से प्रसिद्ध पर्यटन स्थल रिवालसर में शनिवार को ऑल इंडिया तिब्बत सपोर्ट ग्रुप्स के वार्षिक सम्मेलन का आयोजन किया गया।
इसमें नेशनल फाउंडेशन फॉर कम्यूनल हारमनी गृह मंत्रालय भारत सरकार के सदस्य आरके खरीमी ने विशेष रूप से शिरकत की। उन्होंने कहा कि भारत में तिब्बत को सहयोग करने के लिए 300 के करीब विभिन्न संस्थाएं कार्यरत हैं।
लेकिन इन संस्थाओं में तालमेल का अभाव है। सभी संस्थाओं को एक मंच पर एकत्र करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक संगठन कोर ग्रुप्स ऑफ तिब्बत इश्यू बनाया गया है जो तिब्बत के लोगों की समस्याओं को समझते हुए उनका राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग कर सके।
उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री के चीन के दौरे के बाद वहां के राष्ट्रपति से वार्ता से दोनों देशों के रिश्तों में सुधार हुआ है। इस समय तिब्बत को सहयोग करने वाले सभी संगठन मिलकर भारत के नेताओं से आग्रह करें कि वे चीन की सरकार से कहें कि तिब्बत के बारे में महामहिम दलाईलामा से बात करें।
तिब्बत को आजाद करें ताकि तिब्बती लोग खुशी से अपने देश लौट सकें। सम्मेलन में इंडो तिब्बत फ्रेंडशिप सोसाइटी के अध्यक्ष लाभ सिंह, उपाध्यक्ष संजय कुमार, सचिव नवीन गुप्ता, कोआर्डिनेटर कौन छोडक, तेनजिन पाल देन, सदस्य ढमेश्वर ठाकुर, नरेश कुमार लायेंग आदि मौजूद रहे।