एनसीसी कैडेट भुंतर हवाई अड्डे में एयरक्राफ्ट की उड़ान भरना सीखेंगे। इससे पहले कैडेटों को प्रदेश से बाहर जाना पड़ता था। अब हिमाचल में ही इन्हें ये सुविधा मिल जाएगी। सालों से यहां चल रही हैंगर (पार्किंग स्थल) की समस्या दूर गई है और केंद्रीय रक्षा मंत्रालय के ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन ने एयरक्राफ्ट के हैंगर को मंजूरी दे दी है।
भुंतर एयरपोर्ट में हैंगर का निर्माण किया गया है, लेकिन हैंगर के आगे एयरपोर्ट की सुरक्षा दीवार होने से यहां एयरक्राफ्ट को नहीं रखा जा सकता था। ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन की मंजूरी के बाद अब प्रशासन ने भूमि स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
एयरपोर्ट अथॉरिटी भुंतर ने हैंगर को एयरपोर्ट क्षेत्र में लाने के लिए बन रहे एस्टीमेट से पहले एनसीसी कुल्लू से ड्राइंग मांगी है। एयरक्राफ्ट को पार्क करने के लिए बने पार्किंग स्थल का काम पूरा हो जाने से एनसीसी कुल्लू को दो सीटर वायरस एस डब्ल्यू-80 गरुड़ नामक दो माइक्रो एयरक्राफ्ट मिल जाएंगे।
एनसीसी कुल्लू के कमान अधिकारी विंग कमांडर देवाशीष डे ने बताया कि एयरक्राफ्ट आने से एनसीसी कैडेट भुंतर में उड़ान भरना सीखेंगे। उन्हें एयरफोर्स में भी जाने का अवसर मिलेगा। इसका लाभ 350 एनसीसी कैडेटों को मिलेगा।
कुल्लू में एकमात्र एनसीसी एयर विंग- हिमाचल के कुल्लू में एकमात्र एनसीसी एयर विंग है। जहां 350 कैडेट हैं। दिसंबर 2017 को 30 कैडेटों को उड़ान सिखाने के लिए हिसार ले जाना पड़ा था। चंडीगढ़, लुधियाना, अमृतसर, पटियाला तथा करनाल में भी कैडेटों को ले जाया जाता रहा है। अब भुंतर में यह सुविधा मिल जाएगी।