बिलासपुर में 3 अक्तूबर को पीएम मोदी का दौरा फाइनल होने से हिमाचल के लोगों को बिलासपुर में एम्स खुलने की आस बंध गई है। एम्स के निर्माण के लिए बिलासपुर के कोठीपुरा में जगह चिह्नित कर ली गई है। जेपी नड्डा ने अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट शेयर कर लोगों से जानकारी शेयर की कि 1229.07 बीघा जमीन पर एम्स बनेगा।
अभी तक एम्स के नाम पर 680 बीघा जमीन ट्रांसफर हो चुकी है। एम्स के नाम चंगर प्लासनियां, नोआ, राजपुरा में पशुपालन विभाग की 519.44 बीघा जमीन ट्रांसफर हो चुकी है। चंगर प्लासनियां और नोआ से ही 112.04 बीघा जमीन का एनओसी आना बाकी है, इस पर विभाग की इमारतें बनी हैं।
केंद्र सरकार से इसका पैसा जमा होने के बाद इसका भी एनओसी आ जाएगा। इसके अलावा राजस्व विभाग की चंगर प्लासनियां में 160.5 बीघा जमीन एम्स के नाम ट्रांसफर हो चुकी है। राजपुरा और नोआ में वन विभाग की 435.14 बीघा जमीन है। इसकी फाइल केंद्र को जा चुकी है। अब केंद्र से मंजूरी होना बाकी है।
कांग्रेस की रूपरेखा, मोदी सरकार ने अमल में लाई
एम्स की रूपरेखा केंद्र में कांग्रेस कार्यकाल में 2013 के बजट में बनाई गई थी। योजना आयोग ने प्लानिंग की थी कि एक आईआईएम, आईआईटी, एम्स, केंद्रीय विश्वविद्यालय, एनआईएफ हर राज्य को दिया जाए। बड़े राज्यों के लिए इस तरह के दो संस्थान दिए जाएंगे।
इसके बाद 2014 मई में केंद्र में सरकार बदली और नरेंद्र मोदी पीएम बने। उस समय हर्षवर्धन को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का जिम्मा दिया गया। उन्होंने कहा था कि एम्स पुरानी योजना पर ही बनेगा।
इसके बाद सितंबर-अक्तूबर 2014 में जेपी नड्डा ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का पदभार संभाला। उन्होंने दिल्ली से अक्तूबर 2014 में कहा था कि एम्स हिमाचल को मिलेगा।
2014 को मंत्रिमंडल की बैठक में तय हुआ था स्थान
26 दिसंबर, 2014 को हिमाचल कैबिनेट बैठक शिमला में हुई। इसमें आईआईएम सिरमौर, आईआईटी मंडी, केंद्रीय विश्वविद्यालय और एनआईएफ कांगड़ा जिला को दिए गए। इसके बाद बिलासपुर के कांग्रेस नेताओं ने एम्स बिलासपुर को देने की बात कही।
मुख्यमंत्री ने एम्स को बिलासपुर के लिए स्वीकृत कर दिया। इसके बाद कोठीपुरा में एम्स के लिए जमीन का चयन किया गया। 2015 मई में केंद्रीय टीम ने चयनित जगह का दौरा किया था। प्रशासन ने भी तत्कालीन उपायुक्त मानसी सहाय ठाकुर के नेतृत्व में जमीन की डिमार्केशन की थी।
देर आए, दुरुस्त आए: कौल सिंह
शिमला। हिमाचल के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगर एम्स का शिलान्यास कर रहे हैं तो ये अच्छा है। उन्होंने कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार ने देरी की है। अगर ये सिरे लग रहा है तो इस पर वे यही कहेंगे कि देर आए, दुरुस्त आए।
कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि जैसे ही एम्स की घोषणा की गई, उसी वक्त से हिमाचल सरकार ने इसके लिए सहयोग दिया। 50 बीघा जमीन बहुत पहले दे दी गई थी और करीब 350 बीघा जमीन की फॉरेस्ट क्लीयरेंस के आने में वक्त लगना था।
जब हाइडल प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया गया तो उस वक्त भी हिमाचल सरकार कहती रही कि एम्स का काम भी शुरू किया जाए, मगर ऐसा कुछ नहीं किया गया। अगर अब जाकर बात बन रही है तो ये अच्छा है।